बागली: जबलपुर मध्य प्रदेश के शानसन संधारित नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारी नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति को पुजारी नियुक्ति में अवसर दिए जाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ अजाक्स के सचिव एमसी अहिरवार द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया है, कि शासन संधारित के नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारी पदो पर अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के पात्र अभ्यर्थियों को अवसर नहीं दिया जा रहा है, याचिका में इन वर्गों को पुजारी पद पर नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है, मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जबलपुर खंडपीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रुसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल के युगल पीठ के समक्ष हुई,याचिका कर्ता की ओर से प्रस्तुत तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने राज्य सरकार को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान किया है!
इधर इस याचिका की जानकारी मिलते ही सर्व पुजारी महासंघ में भी हलचल तेज हो गई है, महासंघ के प्रदेश महासचिव पं. कौशल जोशी ने तत्काल इस विषय पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष मं. ओंकार दास वैष्णव को अवगत कराया इसके बाद दोनों पदाधिकारी अपनी टीम के साथ उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने पूर्व आइएएस अधिकारी एवं सपाक्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल द्विवेदी से मुलाकात कर इस विषय पर विस्तृत चर्चा की बैठक में मामले के कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया तथा आगे के रणनीति तैयार की गई सर्व पुजारी महासंघ ने संकेत दिए हैं कि इस जनहित याचिका के विरोध में पंडित समाज की ओर से भी न्यायालय में एक अलग याचिका दायर कर अपना पक्ष रखा जाएगा ताकि मंदिरों में पुजारी नियुक्ति से जुड़े वंश परंपरागत एवं विधिक पक्ष को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके अब इस महत्वपूर्ण मामले पर सभी की निगाहें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है जहां राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी इस अवसर पर सर्व पुजारी महासंघ के मार्गदर्शक मदनदास वैष्णव प्रदेश सचिव राजेंद्र पाठक प्रदेश कोषाध्यक्ष कैलाश वैष्णव आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे
