भोपाल।”क्या एक बेरिकेड पूरे पुराने भोपाल की रफ्तार रोक सकता है? क्या इसी बैरिकेडिंग की वजह से आग बुझाने में देरी हुई? और क्या सुरक्षा के नाम पर अब हजारों लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी और कारोबार प्रभावित हो रहा है? इन सवालों का जवाब जानने के लिए हम पहुंचे भोपाल के मोती मस्जिद चौराहे पर…”
भोपाल के मोती मस्जिद के ठीक सामने पिछले कई महीनों से बेरिकेड्स लगे हुए हैं। पुलिस का कहना है कि ये सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए लगाए गए हैं, लेकिन स्थानीय दुकानदारों और आम लोगों का कहना है कि इसकी कीमत अब पूरा पुराना भोपाल चुका रहा है। अगर इसका निराकरण जल्द नहीं हुआ तो हम 7 अगस्त को बड़ा आंदोलन करेंगे।
व्यापारियों का आरोप है कि पहले ग्राहक सीधे बाजार तक पहुंच जाते थे, लेकिन अब लंबा चक्कर लगाने की वजह से कई लोग बाजार आने से ही बचते हैं। इसका सीधा असर उनकी बिक्री पर पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, दुकानदारों का कहना है कि कई बार उन्हें खुद चौराहे तक जाकर ग्राहकों को सामान पहुंचाना पड़ता है, क्योंकि वाहन दुकान तक नहीं पहुंच पाते।
रिक्शा चालकों की परेशानी भी कम नहीं है।
उनका कहना है कि पहले जहां एक सवारी के लिए करीब 2 किलोमीटर चलना पड़ता था, वहीं अब 5 से 6 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय भी बढ़ रहा है और ईंधन का खर्च भी।
वहीं पुलिस का कहना है कि बेरिकेडिंग सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन ऐसी व्यवस्था भी जरूरी है जिससे आम जनता, व्यापारी और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों।
अब बड़ा सवाल यही है…
क्या सुरक्षा और सुविधा के बीच कोई ऐसा रास्ता निकलेगा, जिससे पुराने भोपाल की रफ्तार फिर से सामान्य हो सके?
भोपाल से दीपक तिवारी की रिपोर्ट
