सौसर: जिला पांढुर्णा का हिस्सा बनने के बाद सौंसर जनपद पंचायत लगातार विवादों और चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। बीते 15 दिनों के भीतर कार्यालय परिसर से जुड़े दो अलग-अलग गंभीर मामले उजागर हुए हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की कारगुजारियों से नाराज होकर कर्मचारियों और सचिवों ने सीधे सीईओ से लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं।
कार्यस्थल पर अमर्यादित आचरण का आरोप, तबादले की मांग
पहला मामला जनपद पंचायत की मनरेगा और स्थापना शाखा से जुड़ा है, जहां अधिकारी-कर्मचारियों ने सीईओ को सामूहिक हस्ताक्षरित पत्र सौंपा है। शिकायत के अनुसार, एक सहायक विस्तार अधिकारी (एईओ) और सहायक ग्रेड-3 की एक महिला कर्मचारी अपना शासकीय कार्य छोड़ परिसर में गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इससे कार्यालय की साख खराब हो रही है और दफ्तर पहुंचने वाले ग्रामीणों में भी गलत संदेश जा रहा है। माहौल सुधारने के उद्देश्य से कर्मचारियों ने दोनों में से किसी एक का तत्काल अन्यत्र स्थानांतरण करने की मांग की है।
भविष्य निधि और सेवानिवृत्ति भुगतान के नाम पर अवैध वसूली
दूसरा गंभीर मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है। सचिव शाखा प्रभारी पर सचिवों ने सीधे घूस मांगने का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, प्रत्येक सचिव से पीएफ आहरण के एवज में 5-5 हजार रुपये की मांग की जा रही है। इतना ही नहीं, अप्रैल माह में सेवानिवृत्त हुए पीसीईओ रविशंकर गुप्ता ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
सीईओ का कड़ा रुख, निलंबन की कार्रवाई शुरू
मामला संज्ञान में आते ही सीईओ ने आरोपी को फटकार लगाई। उन्होंने प्रभावित सचिवों से लिखित शिकायत दर्ज कराकर आरोपी कर्मचारी के निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब पूरे क्षेत्र और जनपद कर्मियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
