
बालाघाट। बालाघाट के शहीद भगत सिंह जिला चिकित्सालय में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सरदार पटेल यूनिवर्सिटी से संबद्ध आयुर्वेदिक कॉलेज, डोंगरिया की आयुर्वेद विभाग की एक छात्रा को गंभीर अवस्था में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। जानकारी के अनुसार छात्रा ने कॉलेज की लैब में कथित रूप से जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। घटना के बाद कॉलेज के दो प्राध्यापक एवं एक छात्रा उसे तत्काल जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार छात्रा को गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने उसकी जान बचाने के लिए तत्काल उपचार प्रारंभ किया तथा पेट की सफाई (गैस्ट्रिक लैवेज) की प्रक्रिया की गई। चिकित्सकों ने बताया कि जहरीले पदार्थ की अधिक मात्रा शरीर के विभिन्न अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए छात्रा को लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
घटना की सूचना मिलते ही बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे भी शहीद भगत सिंह जिला चिकित्सालय पहुंचीं। उन्होंने उपचार कर रही डॉक्टर ममता मरकाम सहित चिकित्सकीय दल से छात्रा की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली तथा अस्पताल में मौजूद छात्रा एवं संबंधित लोगों से भी बातचीत की। विधायक ने चिकित्सकों से छात्रा के बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
अस्पताल परिसर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए विधायक अनुभा मुंजारे ने आरोप लगाया कि छात्रा पर कॉलेज प्रबंधन द्वारा कम उपस्थिति (अटेंडेंस) के आधार पर जुर्माना (फाइन) जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान थी। विधायक ने कहा कि यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं तो यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार छात्रों से ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि विश्वविद्यालय एवं कॉलेज स्तर पर विभिन्न प्रकार के आर्थिक दबाव और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विधायक ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ होने वाले कथित आर्थिक शोषण और मानसिक दबाव जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विधायक अनुभा मुंजारे ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि वह प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तथा उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से इस घटना की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह करेंगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही,अनियमितता अथवा छात्रों पर अनुचित दबाव बनाए जाने के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थान विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के केंद्र होते हैं। ऐसे संस्थानों में ऐसा वातावरण होना चाहिए जहां छात्र-छात्राएं बिना किसी अनावश्यक मानसिक या आर्थिक दबाव के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। यदि किसी छात्र को किसी कारणवश मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है,तो संस्थान का दायित्व है कि उसे उचित मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
फिलहाल छात्रा का उपचार जिला चिकित्सालय में जारी है और उसकी स्थिति पर चिकित्सकों की लगातार निगरानी बनी हुई है। घटना के कारण छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। वहीं विधायक द्वारा उठाए गए आरोपों और उच्च स्तरीय जांच की मांग के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन एवं संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। मामले के कारणों का स्पष्ट पता जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
