आ रही है पालकी जय महाकाल की, उज्जैन में अगस्त क्रांति

उज्जैन। सावन की पहली सवारी से पहले महाकाल की नगरी पूरी तरह भक्ति, सेवा और विकास के रंग में रंग गई है। 3 अगस्त को शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से भगवान महाकाल की पालकी निकलेगी और परंपरा के अनुसार मोक्षदायिनी मां शिप्रा के तट रामघाट पहुंचेगी। जहां मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक और पूजन-अर्चन होगा। इसके बाद बाबा महाकाल नगर भ्रमण करते हुए विभिन्न मार्गों से पुन: महाकाल मंदिर लौटेंगे।

इस बार की सवारी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं होगी, बल्कि उज्जैन के बदलते स्वरूप और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की भी झलक प्रस्तुत करेगी। कुछ समय पहले तक जिन मार्गों पर खुदाई, नाला निर्माण, सडक़ चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने और निर्माण कार्यों की वजह से चुनौतियां दिखाई दे रही थीं, वहीं अब श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सवारी मार्ग तेजी से संवर चुका है। इन तैयारियों के पीछे संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा और महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक से लेकर एसपी प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने अभूतपूर्व समर्पण का परिचय दिया। पांचों अधिकारियों ने स्वयं मैदान में उतरकर लगातार निरीक्षण किए, विभागों के बीच समन्वय बनाया और दिन-रात कार्यों की मॉनिटरिंग की। यही कारण रहा कि समय कम होने के बावजूद चुनौतीपूर्ण कार्य निर्धारित अवधि में पूरे किए जा सके। नगर निगम, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, उज्जैन विकास प्राधिकरण, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति, स्मार्ट सिटी सहित सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी लगातार ड्यूटी पर जुटे रहे। रात के अंधेरे में भी मशीनें चलती रहीं, मजदूर काम करते रहे और अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर कार्यों की गति बढ़ाते रहे। ठेकेदारों और श्रमिकों का लगातार उत्साहवर्धन किया गया, जिससे हर चुनौती का समाधान समय रहते निकलता गया।

 

सिंहस्थ की रिहर्सल सवारी

इस बार की सवारी को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का पहला बड़ा रिहर्सल भी माना जा रहा है। जिन मार्गों से बाबा महाकाल की पालकी निकलेगी, वही मार्ग भविष्य में करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही का आधार बनेंगे। प्रशासन अभी से यह अभ्यास कर रहा है कि विशाल जनसमूह, साधु-संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं का आवागमन किस प्रकार सुचारु रूप से संचालित किया जाए। सुरक्षा, यातायात, भीड़ प्रबंधन और आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं को भी इसी दृष्टि से परखा जाएगा। सिंहस्थ-2028 के लिए शहर में सडक़ चौड़ीकरण, नए पुल, घाटों का विस्तार, नाला निर्माण, यातायात सुधार और आधारभूत सुविधाओं के विकास का जो व्यापक अभियान चल रहा है, उसकी झलक अब महाकाल की पहली सवारी में भी दिखाई देगी। वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्य भविष्य के भव्य उज्जैन की नींव बन रहे हैं।

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