मिज़ोरम में एचआईवी का प्रसार देश में सबसे सबसे अधिक 2.85 प्रतिशत है

आइजोल, (वार्ता) मिजोरम में एचआईवी/एड्स की प्रसार दर देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक 2.85 प्रतिशत है।

मिजोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (एमएसएसीएस) के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 1990 से जून 2026 के बीच राज्य में एचआईवी से संक्रमित 34,745 मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े गुरुवार को यहां मिजोरम विधानमंडल के एचआईवी/एड्स फोरम की बैठक में पेश किए गए।

बैठक में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के ‘मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा’ (एमएएस) अभियान के तहत राज्य की प्रगति की भी समीक्षा की गयी।

अभियान के तहत निर्धारित 95-95-95 लक्ष्यों के अनुसार, एचआईवी के साथ जीवन जी रहे 95 प्रतिशत लोगों को अपनी एचआईवी स्थिति की जानकारी होनी चाहिए, जांच में एचआईवी संक्रमित पाए गए 95 प्रतिशत लोगों को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) मिलनी चाहिए और एआरटी ले रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरस का स्तर इतना कम होना चाहिए कि वह दबा हुआ हो।

अगस्त तक मिजोरम में केवल सैतुअल जिला ही ‘सुरक्षित’ श्रेणी हासिल कर सका था। इसका अर्थ है कि जिले ने तीनों 95-95-95 लक्ष्यों को हासिल कर लिया है।

खावजावल, हनाथियल, मामित, चंफाई, सेरछिप और कोलासिब जिलों ने तीन में से दो लक्ष्य हासिल किए हैं, जबकि सियाहा, लवंगतलाई, लुंगलेई और आइजोल ने इनमें से एक या कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं किया है।

पूरे राज्य में पहले 95 का स्तर 83 प्रतिशत, दूसरे का 92 प्रतिशत और तीसरे का 95 प्रतिशत या उससे अधिक रहा।

एमएसएसीएस की परियोजना निदेशक डॉ. जेन रिनसांगी राल्ते ने बताया कि सभी विधायकों ने आर्थिक रूप से कमजोर एचआईवी संक्रमित लोगों की सहायता के लिए 50,000 रुपये प्रत्येक का योगदान दिया है। इस तरह एकत्र किए गए 20 लाख रुपये का इस्तेमाल एआरटी लेने वाले मरीजों के इलाज और उनके आने-जाने के खर्च में सहायता के लिए किया गया है।

बैठक में एचआईवी और सिफलिस की शिशुओं में शुरुआती जांच को मजबूत करने का भी प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत शिशुओं के रक्त के नमूनों को नागालैंड की किसी प्रयोगशाला में भेजने के बजाय मिजोरम में ही जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गयी।

स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने विधायकों से अपना एचआईवी परीक्षण कराने और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों को भी जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान और समय पर एआरटी शुरू करने के महत्व पर भी जोर दिया।

 

 

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