नैरोबी, 02 जून (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और जानलेवा मौसमी खतरों में से एक ‘भीषण गर्मी’ से निपटने के लिए एक नया वैश्विक अभियान शुरू किया है। विश्व पर्यावरण दिवस से ठीक पहले ‘हीट एक्शन डे’ पर शुरू की गई इस पहल में दुनिया भर के 50 से अधिक शहर एक साथ आए हैं। ‘फिफ्टी एट फिफ्टी’ नामक इस पहल का मुख्य उद्देश्य भीषण गर्मी से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना, अपनी व्यवस्थाओं को परखना, आपस में व्यावहारिक समाधान साझा करना और लोगों को बचाने के साथ-साथ तापमान बढ़ाने वाले प्रदूषण को कम करना है।
इस मुहिम के तहत अंताल्या, लागोस, मेलबर्न, मेंडोज़ा, पेरिस और यांगझोऊ जैसे दुनिया के अलग-अलग हिस्से के शहर एक मंच पर आ रहे हैं ताकि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और अत्यधिक गर्मी से बचने के तरीकों को आपस में साझा कर सकें। यूएनईपी और पेरिस शहर द्वारा शुरू की गई यह पहल उस ‘बीट द हीट’ अभियान को आगे बढ़ाती है, जिसे बेलेम में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कोप30) में स्थानीय स्तर पर अत्यधिक गर्मी से निपटने और टिकाऊ कूलिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। यह अभियान पूरी तरह से आम लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए आसान और व्यावहारिक उपायों को बढ़ावा देता है। इन उपायों में सार्वजनिक स्थानों पर ‘कूलिंग आइलैंड’ यानी ठंडे क्षेत्र बनाना, शहरों में हरियाली का दायरा बढ़ाना, पानी के फव्वारे लगाना, कूलिंग सेंटर विकसित करना, मौसम की समय पर चेतावनी देने वाली प्रणालियाँ स्थापित करना, साइकिल चलाने के रास्ते सुधारना और छायादार जगहों को बढ़ाना शामिल है ताकि शहरों में गर्मी का असर कम हो सके।
यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि अत्यधिक गर्मी पहले से ही दुनिया भर के शहरों में रोजमर्रा की जिंदगी को बदल रही है। आने वाले समय में मौसम के हर बदलते मिजाज में शहरों को खतरनाक तापमान का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति विशेष रूप से छोटे किसानों और समाज के कमजोर लोगों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल जमीन से जुड़े समाधानों को आपस में साझा करके स्थानीय नेताओं को तेजी से काम करने, असमानता को कम करने और शहरों को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करती है।
जैसे-जैसे दुनिया का तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे दुनिया भर के शहरों में लंबे समय तक चलने वाली, बेहद तीखी और बार-बार आने वाली लू का प्रकोप देखा जा रहा है। इसकी वजह से हर साल दुनिया भर में लगभग पांच लाख लोगों की जान चली जाती है और दोपहर के समय स्कूल, बस-ट्रेन जैसी परिवहन व्यवस्था, आम घर और सार्वजनिक स्थान पूरी तरह असुरक्षित हो जाते हैं। यह स्थिति बिजली की मांग को भी बढ़ा रही है और वायु प्रदूषण के साथ मिलकर जनता के स्वास्थ्य और अस्पतालों पर भारी दबाव डाल रही है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने कहा कि अत्यधिक गर्मी दुनिया भर के शहरों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पेरिस में पहले किए गए 50 डिग्री सेल्सियस के काल्पनिक अभ्यास के आधार पर यह अभियान इस विश्वास को पक्का करता है कि शहरों को अत्यधिक गर्मी का पहले से अनुमान लगाने और अपने नागरिकों की रक्षा के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि आपसी सहयोग ही इस बड़े संकट से निपटने का हमारा सबसे शक्तिशाली हथियार है।

