कास्टिंग असिस्टेंट से स्टारडम तक, जानिए कैसे भूमि पेडनेकर ने बनाई अपनी अलग पहचान

यश राज फिल्म्स में असिस्टेंट डायरेक्टर रहीं भूमि पेडनेकर ने कड़े ऑडिशन के बाद ‘दम लगा के हैशा’ से एक्टिंग की शुरुआत की, और आज वह एक फेमस पर्यावरण कार्यकर्ता हैं।

सिनेमा के बड़े पर्दे पर जब कोई कलाकार अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में जगह बना लेता है, तो उसके पीछे सालों की मेहनत और एक अनसुना संघर्ष छिपा होता है। बॉलीवुड की प्रतिभाशाली एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज वह फिल्म जगत का एक ऐसा स्थापित नाम बन चुकी हैं, जिन्होंने पारंपरिक रूप-रंग की रूढ़ियों को तोड़कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

6 साल से ज्यादा समय तक कैमरे के पीछे काम करने के बाद जब उन्हें मुख्य भूमिका मिली, तो उन्होंने एक्टिंग की पूरी परिभाषा ही बदल दी। भूमि पेडनेकर ने एक मुख्य अभिनेत्री के रूप में बड़े पर्दे पर कदम रखने से पहले यश राज फिल्म्स में लगभग 6 साल का समय बिताया।

इस दौरान उन्होंने सहायक निर्देशक और कास्टिंग टीम के हिस्से के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

यश राज फिल्म्स में पर्दे के पीछे का वो लंबा संघर्ष
यश राज फिल्म्स में लगभग 6 साल तक काम करने के दौरान उन्होंने चक दे! इंडिया, रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर और 3 पत्ती जैसी चर्चित फिल्मों की कास्टिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा के साथ काम करते हुए भूमि ने एक्टिंग की बारीकियों को बहुत करीब से समझा, जिसने आगे चलकर उनके खुद के अभिनय करियर की मजबूत नींव रखी।

ढाई महीने की कड़ी परीक्षा और अनोखा पहला ऑडिशन
जब शरत कटारिया अपनी नई फिल्म के लिए संध्या के मुख्य रोल की तलाश कर रहे थे, तब 100 से अधिक महिलाओं ने इस भूमिका के लिए आवेदन किया था। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई उम्मीदवारों का ऑडिशन खुद भूमि ने ही लिया था।

भूमि का अपना पहला ऑडिशन एक डेमो टेप था, जो उन्होंने अन्य अभिनेताओं को संदर्भ देने के लिए तैयार किया था। हालांकि, कास्टिंग टीम ने उसे ही उनका आधिकारिक ऑडिशन मान लिया। इसके बाद लगभग ढाई महीने तक चले कई कड़े स्क्रीन टेस्ट और ऑडिशन के दौर से गुजरने के बाद आखिरकार भूमि पेडनेकर इस ऐतिहासिक शुरुआत के लिए चुना गया।

किरदार में जान फूंकने के लिए बदल डाला पूरा रूप
इस विशेष भूमिका की मांग को पूरा करने के लिए भूमि पेडनेकर ने 1 साल के अंदर अपना वजन 20 किलोग्राम से अधिक बढ़ा लिया था। शूटिंग के दौरान उनका वजन लगभग 90 किलोग्राम तक पहुंच गया था, जो उनके काम के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

फिल्म पूरी होने के बाद उन्होंने एक सख्त डाइट चार्ट का पालन किया और मात्र 5 महीनों में इस अतिरिक्त वजन को कम कर के सबको हैरान कर दिया। भूमि का मानना है कि खान-पान में मात्रा से ज्यादा इस बात का महत्व है कि आप क्या खा रहे हैं।

बहन की पढ़ाई के लिए समर्पित पहली कमाई का किस्सा
भूमि अपनी छोटी बहन समीक्षा के बेहद करीब हैं और दोनों के बीच एक गहरा जुड़ाव है। पहली फिल्म की सफलता के बाद जब भूमि पेडनेकर को सैलेरी के रूप में अपना पहला चेक मिला, तो उन्होंने उन पैसों का इस्तेमाल अपनी बहन के करियर को संवारने के लिए किया।

उन्होंने समीक्षा की जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की एक सत्र की पूरी फीस अपनी पहली कमाई से भरी। यह कदम दर्शाता है कि पारिवारिक मूल्यों और अपनों के सपनों को पूरा करने में भूमि हमेशा आगे रहती हैं।

पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक चेतना की नई मिसाल
एक्टिंग के अलावा भूमि एक बेहद जागरूक नागरिक और सक्रिय पर्यावरण कार्यकर्ता भी हैं। पृथ्वी को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से उन्होंने पूरी तरह से शाकाहारी जीवनशैली को अपना लिया है। साल 2019 में उन्होंने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ आवाज उठाने के लिए ‘क्लाइमेट वॉरियर’ नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की।

इसके साथ ही उन्होंने युवाओं में प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और गर्भनिरोधक देखभाल, पोषण व तपेदिक से जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करने के लिए एक विशेष वेब-सीरीज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच बैठकर आंसू बहाने का अनुभव
अपनी पहली फिल्म की सफलता से भूमि पेडनेकर इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने रिलीज के बाद लगातार 45 दिनों तक स्थानीय सिनेमाघरों में जाकर इसे देखा। इस अनूठे सफर में फिल्म के डायरेक्टर शरत कटारिया भी उनके साथ होते थे।

दोनों हर दिन आम दर्शकों के बीच बैठकर फिल्म देखते, उनके साथ हंसते और भावुक पलों में रोते थे। भूमि को अपनी फिल्मों को आम जनता के साथ थिएटर में देखने का ऐसा शौक लगा कि उन्होंने अक्षय कुमार के साथ आई अपनी अगली हिट फिल्म टॉयलेट: एक प्रेम कथा को भी मुंबई के एक प्रसिद्ध सिनेमाघर में 3 बार जाकर देखा।

 

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