
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में बैतूल- भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग में जंगल के क्षेत्र से फोरलेन सड़क निर्माण किये जाने के संबंध में एनएचएआई की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गयी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने रिपोर्ट पर एनटीसीए को आपत्ति पेश करने के आदेश जारी किये है।
अमरावती महाराष्ट्र निवासी अद्वैत क्योले की ओर से दायर याचिका में बैतूल.भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग क्र 49 को फोरलेन में तब्दील किये जाने को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि केसला.भौंरा. बरेठा के जंगल से फोरलाइन हाईवे निर्माण के लिए एनटीसीए से अनुमति नही प्राप्त की गयी है। याचिका में कहा गया था कि सड़क बनाने से वन्य जीवों को वाहनों की आवाजाही के कारण दूसरी तरफ जाने में परेशानी होगी और उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहेगा। याचिका की सुनवाई करते हुए 1 अप्रैल 2022 को मप्र हाईकोर्ट ने सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी।
युगलपीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान याचिका की सुनवाई करते हुए कहा था कि 19,5 किमी के जंगल में से 10,5 किमी का हिस्सा ऊपर से ले जाने की सिफारिश पहले से की जा चुकी है, तो उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। सड़क किनारे यदि बैरिकेड्स लगा देंगे तो टाइगर सड़क पार कैसे करेंगे। सड़क के नीचे से टाइगर के लिए रास्ता बनाना पूरी तरह अनुचित है। टाइगर का स्वभाव है कि उसे सामने जंगल दिखेगा, तभी वह रास्ता पार करेगा। उसके जाने के लिए संकरा रास्ता बना रहे हैं, उससे कभी नहीं जायेगा। वह कभी भी रोड पर आ सकता है जिसके कारण टाइगर के साथ लोगों की जान को खतरा रहेगा। युगलपीठ ने एनएचएआई को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये थे।
याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान एनएचएआई की तरफ से बताया गया कि आदेश का पालन करते हुए स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दी गयी है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा।
