
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने सतना पुलिस की विवेचना पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति घटना के समय मुंबई में रह रहा था, तो वह सतना में अपराध कैसे कर सकता है। पुलिस अधिकारी का दायित्व है कि उपलब्ध दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करें, यदि आरोपी के पक्ष में इतने सारे दस्तावेज मौजूद थे, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उसे आखिर किस आधार पर गिरफ्तार किया गया।
कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामले में सतना निवासी सतीश कुमार त्रिपाठी की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट के समक्ष आरोपी की ओर से अधिवक्ता अक्षय नामदेव ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि घटना की सात सितंबर 2025 को वह मुंबई में रह रहा था। उसने मुंबई में निवास, मोबाइल की लाइव लोकेशन, फोटो और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। पुलिस के नोटिस पर वह स्वयं मुंबई से सतना आया और जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा, लेकिन इसके बावजूद केवल वाहन का पंजीकृत स्वामी होने के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हाईकोर्ट ने माना कि आवेदक घटनास्थल पर नहीं मिला था और उसकी गिरफ्तारी मुख्यत: वाहन स्वामित्व के आधार पर हुई। इन परिस्थितियों व विचारण में समय लगने की संभावना को देखते हुए न्यायालय ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया।
