
शाजापुर, वर्ष 2025 में शाजापुर में हिरण व नीलगाय पकडऩे की लिए अपनाई गई बोमा पद्धति एक बार फिर शुरू की जाएगी. क्योंकि कालापीपल विधायक के सवाल पर विधानसभा में सरकार ने यह अभियान फिर शुरू किए जाने के संकेत दिए हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने सितंबर-अक्टूबर 2026 में हिरण और नीलगाय रेस्क्यू अभियान दोबारा चलाने की घोषणा की है. यह अभियान शाजापुर और उज्जैन जिलों के उन इलाकों में चलाया जाएगा जहां फसलें वन्यजीवों से प्रभावित होती हैं. इसका मुख्य मकसद किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना है. यह घोषणा कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी के विधानसभा के प्रश्नकाल में उठाए गए सवाल के जवाब में की गई. विधायक ने सरकार से पूछा था कि क्या साल 2025 में कालापीपल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत बोमा तकनीक से वन्यजीवों का रेस्क्यू किया गया था और क्या आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे. इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से जवाब देते हुए राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने सदन को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि साल 2025 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत चलाए गए अभियान का मकसद काले हिरण और नीलगाय द्वारा किसानों की फसलों को पहुंचाए जाने वाले नुकसान को कम करना था.
सितंबर-अक्टूबर में है संभावना…
जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा सितंबर-अक्टूबर 2026 में अनुकूल मौसम और वन्यजीवों की मौजूदगी को देखते हुए यह अभियान फिर से शुरू किया जाएगा. इसके तहत फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जानवरों को पकडक़र सुरक्षित जंगलों और अभयारण्यों में भेजा जाएगा. यही नहीं सरकार द्वारा केवल हिरण और नीलगाय को पकड़ा ही नहीं जाएगा. बल्कि सरकार ने बजट वर्ष 2025-26 से टाइगर रिजर्व की बफर क्षेत्र विकास योजना के तहत नया कदम उठाया है. इसके तहत इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव वाले संवेदनशील वन इलाकों में किसानों की फसलों को बचाने के लिए जंगल की सीमा पर फेंसिंग लगाई जाएगी. इस दौरान विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने पहले भी कालापीपल क्षेत्र से हिरण और नीलगाय को रेस्क्यू कर अभयारण्यों में भेजने के लिए सरकार का धन्यवाद किया. उन्होंने किसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रखने पर जोर दिया.
पूर्व में 21 दिन चला था अभियान…
शाजापुर जिले में हिरणों को पकडऩे का 21 दिन चला था, जो अभियान 4 नवंबर को पूरा हुआ था. वन विभाग ने दक्षिण अफ्रीका की विशेष टीम के सहयोग से 15 अक्टूबर को यह अभियान शुरू किया था. इस दौरान 846 काले हिरण और 67 नीलगाय को पकड़ा गया था. अभियान के दौरान वन विभाग और दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों ने मिलकर कई चरणों में वन्यजीवों को पकड़ा.
