यूसीसी लागूकर मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास

मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा
निश्चित रूप से 21 जुलाई 2026 मध्यप्रदेश के इतिहास का स्वर्णिम दिन के रूप में याद किया जाएगा। क्योंकि इसी दिन मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार ने विधानसभा में सर्वसम्मति से यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को पारित किया है।इसके लागू होने से मध्यप्रदेश देश का चौथा राज्य बन गया है। हालांकि यूसीसी लागू करने की दिशा में बीजेपी शासित कई राज्यों ने पहल शुरू कर दी है क्योंकि यह देश के नागरिकों की वर्षों पुरानी मांग है कि देश के सभी नागरिकों के लिए एकसमान कानून व्यवस्था होनी चाहिए। धर्म अथवा मजहब के आधार पर देश में कानून की व्याख्या नहीं होनी चाहिए‌।

आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र में यूसीसी हमेशा रहा है।सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से कहा है कि यूसीसी को तत्परता से लागू करें क्योंकि देश में एक विधान नहीं होने के कारण न्याय करने में न्यायाधीश और वकीलों को बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दुनिया के हर देश में एक विधान है तो भारत में क्यों नहीं। किसने रोका था ऐसा करने से यह एक बड़ा सवाल है। डॉ मोहन यादव की नेतृत्व वाली सरकार ने वाकई इतिहास रचा है। 19 जुलाई को भोपाल के जगदीशपुर में अपनी कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को मंजूरी दी और दूसरे दिन ही सदन में पेश कर सबको चौंका दिया। 105 पेज के यूंसीसी विधेयक में सात चैप्टर है
जिनमें विस्तार पूर्वक तमाम जानकारियां उपलब्ध हैं। इन चैप्टरों में विवाह, विवाह विच्छेद, उतराधिकार, वसीयती उतराधिकार, लिव इन रिलेशनशिप सहित अन्य जरूरी प्रावधानों को विस्तार से परिभाषित किया गया है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि आदिवासी भाई बहन पर यूसीसी लागू नहीं होगा। क्योंकि इन्हें इससे बाहर रखा गया है। मोहन सरकार ने यूसीसी ड्राफ्ट को लेकर सभी वर्गों से व्यापक जनसंवाद किया और इसके लिए समिति गठित की। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी और इसके बाद सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसलिए विपक्षी दल कांग्रेस का यह आरोप लगाना कि यह चुपके से बिल पेश किया गया है इसमें दम नहीं है। विपक्ष को इस मसले पर सिर्फ राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। प्रदेश हित में उठाए गए कदमों का स्वागत करना एक सकारात्मक राजनीति कही जाती है। यूंसीसी में कई बड़े और क्रांतिकारी बदलावों की सिफारिशें की गई हैं। नागरिकों के अधिकार को संरक्षित किया गया है।

यूसीसी लागू होने से मुस्लिम बेटी अब पिता की आधी संपत्ति की हकदार होगी। सभी धर्मों के लोगो को अब विवाह के लिए पुरुष की उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 साल अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। गत दिनों नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे ( एनएफएचएस-6) में खुलासा हुआ है कि मध्यप्रदेश में कम उम्र में होने वाली शादी का स्वरूप बदल रहा है। अब यह समस्या सिर्फ बेटियों तक सीमित नहीं है।

हर चौथा युवक 21से पहले दूल्हा बन रहा है। पहली बार मध्यप्रदेश में 21 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले शादी करने वाले 25 प्रतिशत युवकों की संख्या 18 वर्ष से पहले शादी करने वाली 20 प्रतिशत लड़कियों से अधिक हो गई है। विशेषज्ञ इसे पारिवारिक हालात के संकट का संकेत मानते हैं। जैसे ही बच्चे पढ़ाई छोड़ते हैं, उनके सामने करियर नहीं, बल्कि शादी की जिम्मेदारी खड़ी कर दी जाती है। कम उम्र में लड़कों की शादी के मामले में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय औसत से 9.1 प्रतिशत आगे है। सबसे हैरानी की बात है कि मध्यप्रदेश में शिक्षा से दूरी कम उम्र में विवाह बड़ी वजह है। 33.7 % लड़कियां ही 10वीं तक की पढ़ाई पूरी कर पा रही हैं। वहीं, सिर्फ 42 % लड़के ही दस साल या उससे अधिक की स्कूली शिक्षा पूरी पा रहे हैं।

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