सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष : मोदी

सोमनाथ, 11 मई (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि 75 वर्ष पहले शुरू हुआ सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की स्वतंत्र चेतना और प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना का उद्घोष था।

श्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में विग्रह प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित ‘अमृत महोत्सव’ को संबोधित करते हुए कहा कि “समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं और काल स्वरूप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और सनातन चेतना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा, “ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है, आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, उन्हीं की शरण में आज सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है।”

श्री मोदी ने स्वयं को “दादा सोमनाथ का अनन्य भक्त” बताते हुए कहा कि वह अनेक बार यहां आ चुके हैं, लेकिन इस बार यहां पहुंचते हुए उन्हें “समय की यात्रा” का विशेष अनुभव हुआ।

उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्र भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक था। श्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने 500 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर आधुनिक भारत की नींव रखी और सोमनाथ के पुनर्निर्माण के माध्यम से दुनिया को संदेश दिया कि भारत केवल स्वतंत्र ही नहीं हुआ है, बल्कि अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त करने के मार्ग पर भी अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया था और अब प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने का अवसर मिला है। उन्होंने इसे “हजार वर्षों की अमृत यात्रा” का अनुभव बताया।

श्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का भी महोत्सव है।

इस अवसर पर श्री मोदी ने देशवासियों और भगवान सोमनाथ के करोड़ों भक्तों को शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई का दिन एक और कारण से भी विशेष है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किए गए थे। उन्होंने कहा कि भारत ने 11 मई को तीन परमाणु परीक्षण कर अपनी क्षमता और सामर्थ्य का परिचय दुनिया को दिया था।

उन्होंने कहा कि परीक्षणों के बाद विश्व की अनेक शक्तियों ने भारत पर दबाव बनाने का प्रयास किया और आर्थिक प्रतिबंध लगाए, लेकिन इसके बावजूद 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण किए गए, जिससे दुनिया को भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय मिला।

श्री मोदी ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्र सर्वोपरि है और दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती।

उन्होंने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण को “ऑपरेशन शक्ति” नाम दिया गया था, क्योंकि भारत की परंपरा शिव और शक्ति की आराधना से जुड़ी रही है। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि शिव और शक्ति की यह आराधना देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

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