नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (वार्ता) डिजिटल भुगतान समाधान प्रदान करने वाली कंपनी वीजा की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में समृद्ध लोगों की संख्या बढ़ रही है और इसका विस्तार अब मझौले तथा छोटे शहरों में भी तेजी से देखा जा रहा है। “भारत की समृद्ध अर्थव्यवस्था 2025-26” के नाम से मंगलवार को जारी इस श्वेतपत्र रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘समृद्ध भारत’ तेजी से बढ़ रहा है और एक नये चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां उपभोग अधिक सोच-समझकर और उद्देश्यपूर्ण हो गया है, तथा व्यक्तिगत पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। अधिक खरीदारी करने की बजाय समृद्ध उपभोक्ता अब ऐसे उत्पाद चुन रहे हैं जो अर्थपूर्ण, दिखने योग्य और बार-बार खरीदने लायक हों।
श्वेतपत्र में समृद्ध आबादी में उन लोगों को शामिल किया गया है जिनकी आय 10 लाख रुपये से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में 10 लाख रुपये से अधिक आय वाले लोगों की संख्या 69 लाख से बढ़कर 130 लाख हो गयी है। यह एक बड़े उपभोक्ता वर्ग को दर्शाता है, जो आवश्यकताओं से परे खर्च करने और वैकल्पिक श्रेणियों में सक्रिय भागीदारी करने में सक्षम है। खास बात यह पायी गयी है कि समृद्धि अब केवल मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। यह अहमदाबाद, सूरत, जयपुर और लखनऊ जैसे उभरते शहरों में भी फैल रही है, जहां उपभोग का व्यवहार महानगरों जैसा होता जा रहा है।
वीजी द्वारा कराये गये यूगोव अध्ययन और वीजा-नेट के हालिया आंकड़ों (जिसमें यात्रा, भोजन, रिटेल और लाइफस्टाइल क्षेत्र शामिल हैं) के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में इस बात का विश्लेषण किया गया है कि समृद्धि देशभर में उपभोग के पैटर्न को कैसे प्रभावित कर रही है। वीजा कन्सल्टिंग एंड एनालिटिक्स के भारत और दक्षिण एशिया प्रमुख सुष्मित नाथ ने कहा कि समृद्धि अब अवसर विशेष तक सीमित नहीं है। वैकल्पिक खर्च की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है और यह केवल बड़े अवसरों तक सीमित नहीं है। श्री नाथ के अनुसार, यह बदलाव दर्शाता है कि प्रीमियम उपभोग अब व्यापक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, खासकर जब समृद्धि महानगरों से बाहर फैल रही है। अब यह खर्च अनुभव-आधारित होता जा रहा है, जिसमें विशिष्टता, व्यक्तिगत अनुभव और सहज पहुंच की मांग प्रमुख है।

