जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक सिंह व जस्टिस एके निरंकारी की युगलपीठ ने हत्या के एक मामले में आरोपित श्याम बहादुर साहू की अपील निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। वर्ष 2010 में नंद किशोर कोल को भोजन के बहाने बुलाकर उसके हाथ बांधे गए और कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने श्याम बहादुर साहू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
ट्रायल कोर्ट के फैसले के विरुद्ध आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता यश सोनी ने पक्ष रखा। जिन्होंने दलील दी कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान स्पष्ट रूप से यह सिद्ध करते हैं कि आरोपी श्याम बहादुर साहू ने मृतक को पकडक़र रखा, जिससे सह-आरोपी द्वारा उस पर जानलेवा हमला किया जा सके। इस प्रकार आरोपी की भूमिका सामान्य आशय में पूर्ण रूप से स्थापित होती है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि गवाहों के बयानों में मामूली विरोधा भास अभियोजन के पूरे मामले को कमजोर नहीं करते, जब तक कि घटना का मूल स्वरूप स्पष्ट और विश्वसनीय हो। सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध अपराध को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा है तथा निचली अदालत के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई। परिणाम स्वरूप, अपील निरस्त कर दी गई।
