सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको पर यमन के हूती विद्रोहियों ने मिसाइल से हमला किया है। जिजान और यानबू जैसे शहरों में धमाकों के बाद अफरा-तफरी मची और कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।
रियाद, मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ और सऊदी अरब के प्रमुख औद्योगिक शहरों को निशाना बनाकर भीषण हमला किया।
यमन की ओर से दागी गई मिसाइलों और विस्फोटक ड्रोनों ने सऊदी अरब के जिजान और यानबू जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को दहला दिया है। इस हमले के बाद खाड़ी देशों में भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
धमाकों से दहला जिजान
सऊदी अरब के जिजान औद्योगिक शहर में शनिवार सुबह एक के बाद एक कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हूतियों ने जिजान में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई और अरामको से जुड़ी तेल सुविधाओं को सीधा निशाना बनाया।
हमले का असर इतना व्यापक था कि कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई और अंधेरा छा गया। सऊदी सिविल डिफेंस ने एहतियात के तौर पर यानबू प्रांत में ‘नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म’ के जरिए आपातकालीन अलर्ट जारी किया है।
हूतियों ने क्यों किया हमला?
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब सऊदी अरब और यमन के हूती गुट के बीच 2022 से चली आ रही अनौपचारिक शांति टूटती नजर आ रही है। हूती विद्रोहियों ने इस हमले को शुक्रवार देर रात सऊदी अरब द्वारा यमन के होदेइदा शहर पर की गई बमबारी का बदला बताया है।
हूतियों के विदेश मंत्रालय ने पहले ही चेतावनी दी थी कि सऊदी अरब को इन हमलों का भारी हर्जाना भुगतना होगा। गौरतलब है कि सऊदी अरब ने होदेइदा में दूरसंचार सुविधाओं और कमरान द्वीप को निशाना बनाया था, जिसके बाद हूतियों ने जवाबी कार्रवाई की।
वैश्विक तेल बाजार पर संकट
इस हमले ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता पैदा कर दी है। लाल सागर मार्ग पर पहले से ही तनाव जारी है, जहां हूतियों ने हाल ही में सऊदी तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया था। 20 जुलाई को घोषित नाकेबंदी के तहत हूतियों ने दावा किया था कि वे सऊदी अरब के आर्थिक हितों को चोट पहुंचाना जारी रखेंगे। अरामको जैसी विशाल तेल कंपनी पर हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।
