
भोपाल। राजधानी के विशाल नंदीश्वर जिनालय में आयोजित धर्मसभा में नमोस्तु-नमोस्तु के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि आचरण बिना ज्ञान, विवेक बिना शिक्षा और संस्कार बिना जीवन व्यर्थ है। उन्होंने जीवन को संस्कारों की ज्योति बनाने का संदेश देते हुए कहा कि संस्कारों की रक्षा से ही जीवन रूपी फुलवारी महकती है। मुनिश्री ने पापों के नाश से पहले उन्हें समझने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य विद्यासागर एवं आचार्य समय सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि जिनालय में नौ मुनियों का नवधा भक्ति पूर्वक पादग्रहण हुआ। दिनभर पूजा, जाप, तत्व चर्चा और आचार्य भक्ति के कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
