अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक कमर्शियल जहाज को मिसाइल से निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार किया है।
वाशिंगटन, अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने ओमान की खाड़ी में एक कमर्शियल जहाज M/T Lavin के इंजन रूम पर गोलाबारी कर उसे तबाह कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की सैन्य नाकेबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहा था।
चार बार दी गई थी चेतावनी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने जानकारी दी कि M/T लैविन ने कम से कम चार बार नाकेबंदी पार करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि जहाज के चालक दल को बार-बार चेतावनी दी गई और रुकने का आदेश दिया गया, लेकिन निर्देशों की अनदेखी करने के बाद सेना ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर उसे बीच समुद्र में ही रोक दिया। नाकेबंदी दोबारा लागू होने के बाद बेकार किया जाने वाला यह दूसरा व्यापारिक जहाज है।
ईरान का अमेरिकी बेस पर हमला
इस घटना के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए फारस की खाड़ी के आसपास अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत के उदैरी में स्थित अमेरिकी ठिकाने पर हमला कर गोला-बारूद के तीन शेड तबाह कर दिए।
इसके अलावा बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के एक वॉचटावर को भी नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है। इराक के इरबिल में भी अमेरिकी सेना ने विस्फोटक लदे पांच ड्रोनों को मार गिराया, जिससे इलाके में भारी दहशत का माहौल है।
अमेरिका के निशाने पर परमाणु स्थल
अमेरिका ने उत्तरी ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड के नौसैनिक अड्डे और केशम द्वीप पर भीषण बमबारी की है। खबरों के मुताबिक, ईरान के इस्फ़हान प्रांत में भी धमाके सुने गए हैं, जहां ईरान का प्रमुख परमाणु स्थल और हवाई अड्डा मौजूद है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि इन हमलों का मकसद अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को खत्म करना है।
आर्थिक मोर्चे पर हाहाकार
युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता लगभग बंद हो गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो युद्ध से पहले 72 डॉलर के करीब थीं। अमेरिका में भी आम जनता पर इसका बोझ पड़ा है और गैस की औसत कीमत 4.11 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुंची है।
मानवीय संकट को लेकर बढ़ती चिंता
आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक 3,434 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने चिंता जताई है कि करीब 400 जहाजों पर 6,000 नाविक फंसे हुए हैं, जिनके पास भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता की कमी है।
जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वे बातचीत और कार्रवाई दोनों के लिए तैयार हैं, वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका की ‘दादागिरी’ के आगे नहीं झुकेंगे।
