
(मनोज पुरोहित) शाजापुर। प्राचीन काल से बाबा भैरवनाथ नगर कोतवाल के रूप में शाजापुर की भैरव डूंगरी पर विराजमान हैं. हर साल गुरु पूर्णिमा पर यहां आस्था का मेला लगता है. जिस प्रकार सनातनधर्मियों के लिए बाबा भैरवनाथ पूज्यनीय हैं, उसी प्रकार सरकार की नजर में भी यह स्थान भैरव डूंगरी के नाम से ही अंकित है, लेकिन वक्फ की नजर पड़ते ही यह स्थान 1985 में पहाड़ी वाले बाबा के नाम से वक्फ के दस्तावेजों में दर्ज हो गया था. हैरत की बात तो यह है कि दूसरे समुदाय के कोई धार्मिक चिन्ह भी यहां नहीं है. ऐसे में अधिकांश शहरवासियों के मन में यही सवाल है कि ये करिश्मा कब और कैसे हो गया. शायद, ऐसे ही चमत्कारों को रोकने के लिए केंद्र सरकार वक्फ संशोधन बिल लेकर आई है.
गौरतलब है कि बरसों से शाजापुर के लोग भैरव डूंगरी पर बाबा भैरवनाथ की पूजा-अर्चना करते आए हें. नगर कोतवाल के रूप में उन्हें हर गुरु पूर्णिमा पर पूजा जाता है. जहां हजारों की संख्या में सनातनी आस्था की सीढिय़ां चढक़र बाबा भैरवनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. यह सिलसिला नया नहीं, अपितु प्राचीन काल से अनवरत जारी है. अब सवाल यह उठता है कि वक्फ के दस्तावेज में 1985 में हिंदू धर्म की आस्था के केंद्र भैरव डूंगरी को पहाड़ी वाले बाबा के नाम से कैसे और किसने दर्ज किया. वक्फ के जो दस्तावेज मिले हैं, उसमें हल्का नंबर 14 (पुराने समय का) सर्वे नंबर 1178/1 में यह स्थान गिरवर दरगाह पहाड़ी डूंगरी वाले बाबा के नाम से दर्ज है. बड़ा सवाल यह है कि हिंदू धर्म की आस्था का केंद्र बाबा भैरवनाथ का यह पावन धाम वक्फ की सम्पत्ति में कैसे शामिल हुआ.
वक्फ में किसने दर्ज किया…?
नवभारत को वक्फ के जो दस्तावेज मिले हैं, उसके अनुसार गिरवर हल्का नंबर 14 सर्वे नंबर 1178/1 में दरगाह पहाड़ी डूंगरी वाले बाबा के नाम से नगर कोतवाल बाबा भैरव नाथ का मंदिर दर्ज किया है. लेकिन यह किसने और कैसे दर्ज किया, इसके कोई दस्तावेज सामने नहीं आए हैं. शाजापुर में ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं, जिसमें सरकारी या मंदिरों की भूमि को वक्फ में शामिल किया गया है. लेकिन ये किस आधार पर शामिल हुए, इसके ठोस दस्तावेज आज तक वक्फ बोर्ड पेश नहीं कर पाया है.
दूसरे समुदाय का कोई धार्मिक चिन्ह नहीं है…
शहर के अतिप्राचीन नगर कोतवाल के रूप में पूजे जाने वाले बाबा भैरवनाथ की भैरव डूंगरी पर एवं आसपास हिंदू धर्म के सैकड़ों प्रमाण और धार्मिक चिन्ह स्थित हैं, लेकिन दूसरे समुदाय के ना तो कोई धार्मिक चिन्ह और ना ही कोई प्रमाण भैरव डूंगरी तो छोड़ो भैरव डूंगरी के आसपास भी स्थित नहीं है. अब ऐसे में कैसे भैरव डूंगरी को दरगाह पहाड़ी डूंगरी वाले बाबा के नाम से वक्फ की सम्पत्ति में दर्ज हो गई. यह जांच का विषय है.
इनका कहना है
जब से मैंने होंश संभाला है, तब से भैरव डूंगरी पर स्थित नगर कोतवाल हिंदू धर्म के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. मैंने स्वयं भी तत्कालीन प्रभारी मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से भैरव डूंगरी के सौंदर्यीकरण के लिए मांग की थी.
– पं. संतोष जोशी, उपाध्यक्ष, नगर पालिका शाजापुर
प्राचीन काल से ही गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भैरव डूंगरी पर विराजित बाबा भैरवनाथ की पूजा-अर्चना सर्व हिंदू समाज करता आ रहा है. अब ऐसे में कब और कैसे भैरव डूंगरी दरगाह पहाड़ी डूंगरी वाले बाबा के नाम से वक्फ की सम्पत्ति में दर्ज हुई. यह जांच का विषय है. ऐसे ही फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए केंद्र सरकार वक्फ संशोधन बिल लेकर आई है.
– पं. आशीष नागर, अध्यक्ष, सर्व हिंदू उत्सव समिति, शाजापुर
