उज्जैन: 3 अगस्त को भगवान महाकाल की सवारी निकलेगी. परंपरा के अनुसार मोक्षदायिनी मां शिप्रा के पावन जल से बाबा महाकाल का जलाभिषेक और पूजन रामघाट पर होगा. इससे पहले प्रशासन ने रामघाट को अतिक्रमण मुक्त कराने की बड़ी कार्रवाई की है. इन सबके बीच अब रामघाट की प्रतिदिन होने वाली शिप्रा संध्या आरती को लेकर नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है की निजी इवेंट कंपनी को शिप्रा आरती की कमान सोपने की तैयारी है.
23 जुलाई 2026 को रामघाट पर फूल-प्रसादी बेचने वाले व्यापारियों और शिप्रा आरती से जुड़े पुजारी के बीच हुए मारपीट विवाद के बाद पूरा मामला सुर्खियों में आ गया था. महाकाल थाना पुलिस ने दोनों पक्षों पर एफआईआर दर्ज की थी. घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए, जिसके बाद शिप्रा आरती की व्यवस्था और संचालन को लेकर बहस तेज हो गई.
मुनादी कराई, रामघाट हुआ खाली
विवाद के बाद जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रामघाट पर मुनादी कराई. आठ लाउडस्पीकर, पांच गुमटियां, एक काउंटर और हाथ ठेले जब्त किए गए. साथ ही स्पष्ट किया गया कि घाट क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यवसाय या अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अलग-अलग प्रक्रिया सामने आई
शिप्रा आरती को लेकर अब दो अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं. एक पक्ष का कहना है कि आरती पूरी तरह व्यावसायिक स्वरूप ले चुकी है और श्रद्धालुओं से राशि लेकर आरती कराई जाती है, इसलिए इसकी वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए. वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि शिप्रा आरती उज्जैन की धार्मिक पहचान और ब्रांडिंग का महत्वपूर्ण माध्यम है तथा इसे वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर और अधिक व्यवस्थित एवं भव्य स्वरूप में संचालित किया जाना चाहिए.
घाट पर पालकी पूजन
रामघाट क्षेत्र के पुजारियों और धार्मिक संगठनों का कहना है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मां शिप्रा में स्नान और पूजन करने आते हैं. उनकी आस्था का सम्मान होना चाहिए. साथ ही बाबा महाकाल की पालकी जब रामघाट पहुंचती है, तब शिप्रा पूजन और पालकी पूजन की परंपरा भी निर्विघ्न जारी रहनी चाहिए.
विरोध के वीडियो वायरल
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान श्री क्षेत्र पंडा समिति के संयोजक राजेश त्रिवेदी ने भी प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध किया. उन्होंने पुलिस और नगर निगम पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई के आरोप लगाए. उनके बयान और विरोध के वीडियो भी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुए.
निजी संस्था कर सकती है संचालन
नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार रामघाट पर प्रतिदिन होने वाली शिप्रा संध्या आरती के संचालन को नए स्वरूप में देने की तैयारी पर भी मंथन चल रहा है. चर्चा है कि भविष्य में किसी निजी संस्था या एजेंसी के माध्यम से आरती का संचालन कराया जा सकता है. इसके साथ ही इसे अधिक भव्य स्वरूप देने तथा जजमानों के सहयोग से नियमित व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन बताया जा रहा है.
अभी 100 से 500 भेंट
वर्तमान में श्रद्धालुओं से अलग-अलग प्रकार की पूजा-अर्चना एवं आरती के लिए लगभग 100 से 500 रुपये तक की भेंट ली जाती है. यदि भविष्य में किसी निजी संस्था को संचालन की जिम्मेदारी दी जाती है तो इसकी कार्यप्रणाली, शुल्क व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं को लेकर नए सवाल भी खड़े हो सकते हैं. दबी जुबान में रामघाट क्षेत्र के कुछ पुजारी और धार्मिक संस्थाएं इस संभावित व्यवस्था का विरोध भी जता रही हैं.
अभी सवारी पर फोकस
हालांकि अभी तक जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से शिप्रा आरती को किसी निजी संस्था को सौंपने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान सावन और महाकाल की सवारियों की व्यवस्थाओं पर केंद्रित है।अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सावन-भादौ के बाद रामघाट की शिप्रा संध्या आरती की व्यवस्था को लेकर प्रशासन क्या निर्णय लेता है और क्या धार्मिक परंपरा तथा व्यवस्थागत सुधार के बीच कोई नया मॉडल सामने आता है.
