जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ नक राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज के ध्वस्त हिस्से से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट के संज्ञान के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने शहपुरा टोल प्लाजा पर यूजर फीस में करीब 70 प्रतिशत की कटौती कर दी है। कोर्ट ने फिलहाल टोल वसूली पूरी तरह बंद करने से इनकार कर दिया, लेकिन मरम्मत कार्य में तेजी लाने के लिए विशेषज्ञ की राय लेने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 55.60 किमी लंबे मार्ग में केवल 4.8 किमी हिस्सा डायवर्ट है, इसलिए पूर्ण टोल माफी का आधार नहीं बनता। हालांकि, एनएचएआई द्वारा 24 जून 2026 से टोल दरों में लगभग 70 प्रतिशत कमी किए जाने को रिकॉर्ड पर लिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पौड़ी (एलसी-302) रेलवे गेट खोलने की मांग भी की गई, लेकिन रेलवे ने सुरक्षा, तकनीकी बाधाओं, इंटरलाकिंग सिस्टम, रेलवे बोर्ड व सीआरएस की मंजूरी तथा 8.10 करोड़ रुपये की लागत सहित कई कारण बताते हुए इसका विरोध किया।
इन कारणों के आधार पर हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। वहीं मप्र सडक़ विकास निगम ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के लिए निविदा जारी हो चुकी है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय से पहले सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता अखिलेश मिश्रा से यह राय ली जाए कि ओवरब्रिज को सबसे कम समय में सुरक्षित रूप से कैसे चालू किया जा सकता है। रिपोर्ट एक सप्ताह में पेश करने के आदेश दिए गए हैं। न्यायालय ने मामले को निगरानी के लिए 30 अगस्त को अगली सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया है।
