नयी दिल्ली, 09 सितम्बर (वार्ता) नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) से पूछे गए सवाल से आखिरकार स्थिति साफ हो जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने बीसीसीआई से यह बताने को कहा है कि उसे और राज्य संघों को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए।
यह सवाल मंगलवार (8 सितंबर) को चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कई राज्य संघों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठाया।
‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंच ने बीसीसीआईऔर राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों से कहा कि वे इस बारे में निर्देश लें कि उनके पदाधिकारियों की सेवा की शर्तें 2025 के एक्ट (जो अब लागू हो चुका है) के तहत क्यों नहीं आनी चाहिए। उम्मीद है कि बीसीसीआई के वकील जल्द ही अपना रुख स्पष्ट करेंगे।
बीसीसीआई के अधिकारी टिप्पणी के लिए तुरंत उपलब्ध नहीं थे, लेकिन किसी दूसरे मामले में बोर्ड की दलीलों से उसका रुख साफ है। उसने पहले भी तर्क दिया है कि नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट बीसीसीआई पर लागू नहीं होता है।
ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव से जुड़े एक मामले में ओडिशा हाई कोर्ट के सामने बीसीसीआई ने कहा था, “…भले ही नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 लागू हो गया है, लेकिन क्रिकेट खेल को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत आने वाले ‘निर्धारित खेल’ के तौर पर अधिसूचित नहीं किया गया है।”
उस हलफनामे में यह नहीं बताया गया है कि स्पोर्ट्स एक्ट के प्रति बीसीसीआई का विरोध असल में क्या है। हालांकि, उसका लंबे समय से यही रुख रहा है कि चूंकि बीसीसीआई को सरकारी ग्रांट नहीं मिलती, इसलिए उसे इस एक्ट के दायरे में नहीं आना चाहिए।
इसके अलावा, स्पोर्ट्स एक्ट में एक वैधानिक रेगुलेटर और मान्यता देने वाली अथॉरिटी का प्रावधान है, जिसके तहत राष्ट्रीय खेल निकाय आएंगे। वे आरटीआई एक्ट के दायरे में भी आ सकते हैं। बीसीसीआई लंबे समय से उस नियम का विरोध करता रहा है।
इसके अलावा, बीसीसीआई सुप्रीम कोर्ट से मंज़ूर और संशोधित लोढ़ा कमेटी की सिफ़ारिशों को मानता है। इन सिफ़ारिशों के तहत, कोई पदाधिकारी लगातार दो कार्यकाल तक पद पर रह सकता है, जिसके बाद उसे तीन साल के ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ (पद से दूर रहने की अवधि) से गुज़रना होता है।
धूमल ने नॉमिनेशन फ़ाइल किया
पता चला है कि हिमाचल प्रदेश के आईपीएल चेयरमैन अरुण सिंह धूमल और मिज़ोरम के खैरुल जमाल मजूमदार ने जनरल बॉडी की तरफ़ से आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के पदों के लिए अपना नॉमिनेशन फ़ाइल किया है। दोनों का काउंसिल में फिर से चुना जाना तय है। चुनाव 18 सितंबर को मुंबई में बीसीसीआई की एजीएम में होगा।
एक और घटनाक्रम में, बीसीसीआई के चुनाव अधिकारी एके ज्योति ने बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) को एजीएम में हिस्सा लेने से रोक दिया। प्रणव अमीन और देश रतन दुबे क्रमशः इन दोनों एसोसिएशन के नॉमिनेटेड प्रतिनिधि थे, लेकिन चुनाव अधिकारी के आदेश के तहत उन्हें एजीएम में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं होगी।
