
ग्वालियर। ग्वालियर में भी दिल्ली के छात्र आंदोलन की गूंज देखने को मिली। कलेक्ट्रेट पर आंदोलन को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। एक पक्ष जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की मांगों को सही बता रहा था, जबकि खुद को सनातनी बता रहा दूसरा पक्ष आंदोलन के दौरान लगे कथित देश-विरोधी नारों का विरोध कर रहा था। दोनों पक्ष कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उनके बीच विवाद की स्थिति बन गई। पुलिस प्रशासन ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। इसके बाद दोनों पक्षों से ज्ञापन लेकर उन्हें रवाना कर दिया गया।
आंदोलन के समर्थन में पहुंचे अधिवक्ता एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाह ने बताया कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया और उनके खिलाफ केस दर्ज किए गए, उसे आज 25 दिन हो चुके हैं।इसके बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया है। इसी संदर्भ में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देने के लिए शहर के कई अधिवक्ता और अन्य लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अधिवक्ताओं व छात्राओं के साथ बदसलूकी की है। एडवोकेट कुशवाह ने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जो संविधान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता उन छात्रों के साथ खड़े हैं, उसी तरह हम भी उनके समर्थन में हैं।
वहीं, खुद को सनातनी बता रहे ज्ञापन देने पहुंचे दूसरे पक्ष के पंकज ठाकुर ने कहा कि वे दिल्ली के आंदोलन के दौरान लगाए गए कथित देश-विरोधी नारों के विरोध में ज्ञापन देने आए थे। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा का मुद्दा उठाना उचित है, लेकिन आंदोलन के दौरान भगवान और देश के विरोध में नारे लगाने वाले कौन लोग हैं, यह भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ऐसे आंदोलनों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। यदि देश में कहीं भी इस तरह की कथित देश-विरोधी गतिविधियां होंगी तो उनकी राष्ट्रीय सनातन सेना उनका विरोध करेगी।
*कलेक्ट्रेट में आमने-सामने आए दोनों पक्ष*
दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन को बीच-बचाव करना पड़ा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कलेक्ट्रेट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। बाद में एसडीएम अतुल सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाइश दी, उनके ज्ञापन लिए और शांतिपूर्वक रवाना कर दिया।
