
महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
भारतीय जनता युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष बनने का सपना किसका पूरा होगा और किसके सपने चकनाचूर होंगे ये तो आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा लेकिन अभी भाजयुमो नगर अध्यक्ष पद की कुर्सी पाने के लिए जिस प्रकार से अपने-अपने राजनैतिक आकाओं, नेताओं के दरबार में पहुंचकर दावेदारों द्वारा अंतिम दौर की जोर आजमाईश की जा रही है उससे तो स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष की कुर्सी उनके लिए कितने मायने रखती है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के द्वारा जारी की गई संगठनात्मक नियुक्तियों की पहली सूची में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष का नाम नहीं आने से ये भी स्पष्ट नजर आ रहा है कि संगठन के हाईकमान के लिए अध्यक्ष पद के नाम का चयन आसान नहीं हो रहा है। राजनैतिक जानकारों की माने तो जबलपुर से कई दावेदारों के नाम भोपाल तक पहुंच चुके हैं और इनमें से हर एक दावेदार के संबंध जबलपुर भाजपा के कद्दावर नेताओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किस भाजपा नेता की पसंद के नाम पर अंतिम मुहर लगती है उस पर अटकलों का दौर तो जारी है ही साथ ये बड़े नेताओं के बीच प्रतिष्ठा का दांव बनते दिख रहा है। विदित हो कि मध्य प्रदेश के चार बड़े महानगरों में से एक जबलपुर राजनीतिक रूप से काफी अधिक सक्रिय जिला है और यहां होने वाले बदलाव या नियुक्तियां प्रदेश की राजनीति में अपना प्रभाव छोड़ती है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में जारी की गई सूची में जबलपुर ग्रामीण युवा मोर्चा अध्यक्ष के लिए पंकज तिवारी के नाम पर मुहर लग गई थी। उधर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, संघ सहित विभिन्न नेताओं तथा स्थानीय भाजपा संगठन की ओर से कुछ नाम नगर अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ाए गए हैं मगर अंंतिम मुहर किस नाम पर लगेगी ये अब भी पहेली बना हुआ है। विदित हो कि युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अभी आने वाले समय में कई विभिन्न जिलों के नगर अध्यक्ष ग्रामीण अध्यक्ष के नाम की घोषणा करेंगे। खबर तो ये भी है कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के ग्रामीण अध्यक्ष पद पर जिसको नियुक्त किया गया है वो विधायक अजय विश्रोई की पसंद थे और संगठन ने विधायक की पसंद पर अंतिम मुहर लगा दी थी लेकिन जबलपुर नगर अध्यक्ष के नामों पर भी कई कद्दावर भाजपा नेताओं की चिट्ठी भोपाल तक पहुंच चुकी है, जिसके चलते कशमकश और बढ़ गई है।
मौत के बाद एएसआई का प्रमोशन…!
अधिकारी-कर्मचारियों के सेवा के रिकॉर्ड को संभालकर और अपडेट कर रखना कितना जरूरी होता है ये पुलिस मुख्यालय को अब पता चल ही गया होगा। मृत होने के बाद भी पदोन्नति सूची में एक महिला एएसआई का नाम जब पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी की गई सूची में सार्वजनिक हुआ तो चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इतनी बड़ी लापरवाही ने पुलिस मुख्यालय को ये संदेश तो जरूर दे दिया कि विभागीय अभिलेखों का नियमित रूप से अपडेशन करना कितना जरूरी होता है जिससे इस असहज और शर्मनाक स्थिति से बचा जा सके। मामला नरसिंहपुर जिले में एएसआई प्रेमलता ठाकुर के नाम से जुड़ा है जिनका निधन विगत 1 मई 2026 को हो गया था बावजूद इसके एएसआई का नाम हाल ही में जारी की गई पदोन्नति सूची में सामने आया। इस गंभीर चूक ने पुलिस मुख्यालय की सत्यापन प्रक्रिया और रिकॉर्ड संधारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। चूक किससे और कैसे हुई ये तो बाद का विषय है लेकिन हाल ही में पुलिस मुख्यालय के काम को लेकर जो चर्चाएं शहर व जबलपुर पुलिस महकमे में व्याप्त हैं वह काफी निराशाजनक भी हैं। जबलपुर पुलिस कर्मचारियों के खेमे में चर्चाएं तेज हैं कि यदि समय रहते रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन किया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। वहीं विभागीय स्तर पर इसे गंभीर लापरवाही भी माना जा रहा है। आलम ये है कि जबलपुर पुलिस के कुछ अधिकारी व कर्मचारी दबी जुबान से सवाल भी खड़े कर रहे हैं कि जब संबंधित पुलिस अधिकारी का निधन हो चुका था तो उनका नाम पदोन्नति सूची तक कैसे पहुंच गया। इससे तो ये साफ है कि पदोन्नति से पहले सेवा अभिलेखों और कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति का समुचित सत्यापन ही नहीं किया गया। जिसका खामियाजा फिलहाल पुलिस मुख्यालय को अपनी कार्यशैली के बारे में अनाप शनाप सुनकर उठाना पड़ रहा है।
