चेन्नई, (वार्ता) कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सिंगापुर के विकास में भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
श्री चिदंबरम ने सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों के इतिहास को खूबसूरती से दर्ज करने वाली पुस्तक ‘लिटिल इंडिया एंड द सिंगापुर इंडियन कम्युनिटी: थ्रू द एजेस’ का विमोचन करते हुए कहा कि यह पुस्तक भारतीय मूल की सिंगापुरी नागरिक और तमिल सुश्री सौंदरा नायकी वैरावन ने लिखी है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर और तमिलों के बीच 200 साल पुराना इतिहास है।
उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग दो शताब्दियों से वहां रह रहे हैं और उनमें से कई तमिल हैं। उन्होंने कहा, “चूंकि तमिल सिंगापुर की आधिकारिक भाषा है इसलिए मुझे बेहद खुशी और गर्व है कि तमिल सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों में सबसे आगे हैं।”
उन्होंने कहा,“सिंगापुर में लिटिल इंडिया एक महान और समृद्ध जगह है। वहां के लोग हमारी तरह ही रहते हैं बल्कि हमसे भी अधिक आराम, समृद्धि और और खुशी से रहते हैं। यहां से सिंगापुर जाने वाला कोई भी व्यक्ति लिटिल इंडिया की यात्रा करने से बच नहीं सकता।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिंगापुर के विकास में भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका है और वहां के लोगों के बीच जातीय सद्भाव विद्यमान है। उन्होंने कहा,“देवी मरिअम्मन मंदिर वहां का सबसे पहला मंदिर है और धनदायुथापानी (भगवान मुरुगा) मंदिर में थाईपूसम उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। वहां के धार्मिक सद्भाव का स्तर इतना ऊंचा है कि जिसमें बड़ी संख्या में चीनी लोग शामिल होते हैं।”
श्री चिदबंरम ने सुश्री सौंदरा नायकी की लिटिल इंडिया पर लिखी पुस्तक की सराहना करते हुए कहा,“यह हमारी संस्कृति और हमारे इतिहास को दर्शाती है। मैं इस पुस्तक की सराहना करता हूं। उन्होंने कई लोगों से संपर्क किया और जानकारी व आंकड़े एकत्र किए। यह पुस्तक लिटिल इंडिया को बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत करती है। मैं कामना करता हूं कि सौंदरा नायकी इसी तरह लिखती रहें।”
चेन्नई में सिंगापुर के महावाणिज्य दूत श्री एडगर पैंग ने पुस्तक की पहली प्रति प्राप्त की और प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. वी. चोक्कालिंगम ने स्वागत भाषण दिया।
उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक का विमोचन पहली बार 25 अप्रैल को सिंगापुर में हुआ था। देश के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज येओ ने इसका विमोचन किया। इस वर्ष सिंगापुर अपना 60वां स्थापना दिवस मना रहा है। लेखिका श्रीमती सौंदरा नायकी वैरावन ने कहा कि वह इस अवसर पर इस पुस्तक को सिंगापुर के लिए अपना एक छोटा सा योगदान मानती हूं।
