जबलपुर: घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत समक्ष न्यायालय के समक्ष लंबित मुकदमे वापस लेने की शर्त पर आपसी समझौता हुआ था। आपसी समझौते के बाद भी पत्नी दहेज एक्ट के तहत पति तथा ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज प्रकरण वापस लेने को तैयार नही थी। हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने दहेज एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि सक्षम अदालत में समझौते के बाद आपराधिक मुकदमा जारी रखना उत्पीडऩ है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायतकर्ता ने सामान्य आरोप लगाये है। याचिकाकर्ता सास व ननद के खिलाफ आरोप बहुत सामान्य प्रकृति के हैं। याचिकाकर्ता ननंद शादीशुदा है और जबलपुर में अपने पति के साथ अलग रहती है। ऐसा लगता है कि उसे केवल पति के साथ उसके रिश्ते के कारण फंसाया गया है। आपराधिक मुकदमे को पति के साथ रिश्ते की वजह से रिश्तेदारों के खिलाफ जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
यह था मामला-
दरअसल, पन्ना निवासी तौसीफ राइन व अन्य की ओर से दहेज एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त किये जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि तौसीफ का विवाह 25 दिसम्बर 2017 को हुआ था। पत्नी के द्वारा साल 2020 में पति सहित सास-ससुर सहित विवाहित ननद तथा देवर के खिलाफ दहेज एक्ट का प्रकरण दर्ज करा दिया गया। पत्नी के द्वारा ससुराल छोडक़र जाने के बाद उनके खिलाफ दहेज एक्ट का प्रकरण दर्ज कराया गया था, जो न्यायालय में लंबित है।
