
मनीला, 22 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार को ईरान पर पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर कूटनीतिक संपर्कों के दौरान किये गये वादों को पूरा न करने का आरोप ईरान पर लगाया और कहा कि अगर वह समझौते तक पहुंचने के प्रयासों को कमजोर करना जारी रखता है, तो अमेरिका कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा।
मनीला में आसियान मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में श्री रूबियो ने ईरान को सीधा संदेश दिया। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट पर बात करने के लिए ईरान ने सीधे तौर पर और अन्य मध्यस्थों के जरिये भी अमेरिका से संपर्क किया था। उन्होंने हालांकि ईरान की इस मंशा पर सवाल उठाये कि वह वास्तव में बातचीत करना चाहता भी है या नहीं।
श्री रूबियो ने कहा, “अमेरिका हमेशा कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध है। हम खुले विचारों वाले हैं और मतभेदों को बातचीत से सुलझाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।” उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि पिछली सहमतियों का सम्मान नहीं किया गया। उन्होंने कहा , ” दुर्भाग्य से अब तक भले ही हम समझौतों तक पहुंचे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका की बातचीत की इच्छा इस बात पर निर्भर करती है कि ईरान अपनी गंभीर मंशा दिखाता है या नहीं।उन्होंने कहा, “अगर वे गंभीर हैं, तो हम भी गंभीर हैं। अगर वे नहीं हैं, तो हम अपने और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेंगे।”
श्री रूबियो ने कहा कि तात्कालिक विवाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात नियंत्रित करने की ईरान की मांग पर केंद्रित है। इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल आपूर्ति गुजरती है। उन्होंने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि ईरान के पास इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने का कोई वैध अधिकार है।
उन्होंने कहा, “यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात को नियंत्रित करने के अधिकार की मांग कर रहा है, जो किसी भी मौजूदा कानूनी तंत्र के तहत उसके पास नहीं है।” उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर एकतरफा नियंत्रण थोपने की अनुमति देना खतरनाक वैश्विक मिसाल कायम करेगा, जो पश्चिम एशिया से भी आगे तक फैल जायेगी।
उन्होंने कहा, “अगर हम ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई देश यह तय कर सकता है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को नियंत्रित करेगा, चुंगी वसूलेगा और अगर आप भुगतान नहीं करते हैं, तो आपके जहाजों को उड़ा देगा तो हम बहुत ही खतरनाक मिसाल बनायेंगे, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में भी दोहरायी जायेगी।”
श्री रूबियो ने कहा कि यह मुद्दा ईरान के साथ तात्कालिक टकराव से कहीं आगे का है और यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार को संचालित करने वाले मूलभूत सिद्धांतों में से एक पर चोट करता है। उन्होंने कहा, “यहां जो दांव पर लगा है, वह केवल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हो रही घटनाओं का मुद्दा नहीं है। यह जहाजों की निर्बाध आवाजाही का बेहद बुनियादी सिद्धांत है।” उन्होंने चेतावनी दी कि जलमार्ग से जहाजों के स्वतंत्र आवागमन में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम होंगे।
उन्होंने कहा, “अगर उस पर खतरा मंडराता है तो मुझे लगता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ जायेगी और पिछले 150 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वाणिज्य को सहारा देने वाले नियम भी खतरे में पड़ जायेंगे। और ऐसा होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” कूटनीति के प्रति अमेरिका की प्राथमिकता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि बातचीत तभी सफल हो सकती है, जब वादों का सम्मान किया जाये।
श्री रूबियो ने कहा, “अमेरिका सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत के लिए तब तक तैयार और इच्छुक है, जब तक कि किये गये वादों को निभाया जाये।” उन्होंने कहा कि यदि कूटनीतिक समझौतों को यूं ही नजरअंदाज किया जाता रहा तो अमेरिका इसका जवाब देगा। जब उन वादों को पूरा नहीं किया जाता जैसा इस मामले में हुआ है तो इसके परिणाम भुगतने होंगे।
श्री रूबियो ने तर्क दिया कि ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बनाने के लिए इस रणनीतिक जलमार्ग का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए अमेरिका का कड़ा रुख अपनाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गयी तो ‘इस क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा और दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति’ एक तरह से उस शासन द्वारा बंधक बना ली जायेगी, जिसे उन्होंने ‘अराजक शासन’ करार दिया।
दक्षिण-पूर्व एशिया पर ध्यान केंद्रित करते हुए श्री रूबियो ने आसियान सदस्यों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि कई वैश्विक संकटों के बावजूद यह क्षेत्र अमेरिकी विदेश नीति का आधार बना हुआ है।
पिछले वर्ष के अमेरिका-आसियान शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से की गयी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए श्री रूबियो ने कहा कि अमेरिका ‘आसियान के साथ 100 प्रतिशत खड़ा है’। उन्होंने इस क्षेत्रीय संगठन को दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिका की सहभागिता का मुख्य मंच बताया।
आर्थिक पहलों के व्यापक पैकेज की घोषणा करते हुए श्री रूबियो ने कहा कि अमेरिका दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक परियोजनाओं में 2.5 अरब डॉलर का निवेश करेगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय विकास, आर्थिक मजबूती और सुरक्षा को बढ़ावा देना है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह निवेश विकास सहायता के बजाय अमेरिका के रणनीतिक हितों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, “यह कोई दान नहीं है। यह हम इसलिए नहीं कर रहे हैं कि हम अच्छे लोग हैं। यह हमारे राष्ट्रीय हित में है। आपके प्रत्येक देश और पूरे क्षेत्र के साथ हमारी साझेदारी अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है और हम इसे कभी नहीं छोड़ेंगे।”
श्री रूबियो ने इस क्षेत्र में विमानन बुनियादी ढांचे, ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं का समर्थन करने के लिए ‘यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन’ के माध्यम से 1.5 अरब डॉलर की नयी फंडिंग की भी घोषणा की। इसके अलावा अमेरिका आसियान देशों में बारूदी सुरंगों को हटाने के कार्यक्रमों के लिए लगभग 13 करोड़ डॉलर की सहायता प्रदान करेगा। साथ ही तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), बिजली ग्रिड, असैन्य परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर सहयोग का विस्तार करेगा।
दक्षिण-पूर्व एशिया को भविष्य के वैश्विक विकास का केंद्र बताते हुए श्री रूबियो ने कहा कि इस क्षेत्र के घटनाक्रम आने वाले दशकों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था को आकार देंगे। उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि 21वीं सदी का भविष्य और इसकी कहानी इसी क्षेत्र में लिखी जायेगी और इस बात से तय होगी कि यहां घटनाक्रम कैसे आगे बढ़ते हैं।” उन्होंने दोहराया कि अमेरिका आसियान का दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार बने रहने का इरादा रखता है।
