लोन का झांसा देकर 1 करोड़ ठगे, कोर्ट के आदेश से वापस मिली रकम

इंदौर:कारोबार विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपए का लोन दिलाने का झांसा देकर ठगे गए कारोबारी को आखिरकार राहत मिल गई. लोन के नाम पर गंवाए 1 करोड़ रुपए जिला कोर्ट के आदेश के बाद वापस मिल गए. साइबर सेल की कार्रवाई के दौरान आरोपियों के खातों में फ्रीज कराई गई राशि को बैंक ने कोर्ट के निर्देश पर पीड़ित के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया. साइबर ठगी के मामलों में इतनी बड़ी रकम की वापसी इंदौर जिला न्यायालय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

मामला उस समय सामने आया जब कारोबारी को व्यवसाय विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपए के ऋण की जरूरत थी. कई प्रयासों के बाद चेन्नई की एक कंपनी से जुड़े लोगों ने उससे संपर्क किया. आरोपियों ने कंपनी के माध्यम से लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिलाया और कारोबारी को चेन्नई बुलाया.आरोपियों ने विश्वास हासिल करने के लिए 10 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट दिखाया और लोन प्रक्रिया पूरी होने का दावा करते हुए दस्तावेज, चेक और स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए. इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, ब्याज, रजिस्ट्रेशन और अन्य खर्चों के नाम पर उससे करीब 1 करोड़ रुपए जमा करा लिए.

रकम लेने के बाद आरोपियों ने लोन देने के बजाय टालमटोल शुरू कर दी और बाद में डिमांड ड्राफ्ट भी वापस ले लिया. इसके बाद कारोबारी को धोखाधड़ी का अहसास हुआ और उसने शिकायत दर्ज कराई. आरोपियों ने ठगी का भरोसा बनाए रखने के लिए दोबारा कारोबारी से संपर्क किया. वे चेन्नई से इंदौर आए और वीडियो कॉल पर नकदी दिखाने का दावा किया. आरोपियों ने कहा कि 20 लाख रुपए और देने पर 10 करोड़ रुपए का लोन नकद उपलब्ध करा दिया जाएगा. संदेह होने पर कारोबारी ने अतिरिक्त राशि देने से इनकार कर दिया. जांच में सामने आया कि ठगी में करीब 9 से 10 लोगों का समूह शामिल हो सकता है. इसमें एक महिला, खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताने वाला व्यक्ति और अन्य सहयोगी शामिल हैं.

साइबर सेल ने समय रहते फ्रीज कराए खाते
ठगी की शिकायत के बाद कारोबारी ने क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और थाने में शिकायत दर्ज कराई. साइबर सेल ने आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में मौजूद करीब 1 करोड़ रुपए फ्रीज करा दिए थे. राशि वापस पाने के लिए कारोबारी ने जिला कोर्ट में आवेदन लगाया. कोर्ट ने जांच दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर एक्सिस बैंक को फ्रीज राशि 10 दिन में पीड़ित के खाते में जमा करने के आदेश दिए. इसके पालन में बैंक ने 18 जुलाई को पूरी 1 करोड़ रुपए की राशि कारोबारी के खाते में ट्रांसफर कर दी.

समय पर कानूनी कार्रवाई से सुरक्षित रही रकम
साइबर सेल ने आरोपियों के खातों में मौजूद राशि फ्रीज करा दी थी. न्यायालय के आदेश के बाद बैंक ने पूरी राशि पीड़ित को वापस कर दी है. समय पर कानूनी कार्रवाई होने से ठगी की रकम सुरक्षित रह सकी.
– पीड़ित के अधिवक्ता, रोहित जैन

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