नगरपालिका परिषद् द्वारा पीपीपी मोड का प्रस्ताव सफल होगा या नहीं ?, झाबुआ के बस स्टैंड स्थित 13 दुकानों का विवाद पूरे शहर में बना हुआ जनचर्चा का विषय

झाबुआ। नगरपालिका परिषद् द्वारा पिछले दिनों 6 जुलाई को विशेष सम्मेलन के माध्यम से शहर में स्थित चाचा नेहरू बालोद्यान की जमीन पर पीपीपी मोड पर कमर्शियल परिसर बनाने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के बारे में झाबुआ शहर में जनचर्चा है कि परिषद् के उक्त निर्णय से यह स्थिति बनने वाली है ना माया मिली ना राम, क्योंकि जो प्रस्ताव जिस जमीन के लिए किया गया है वह ग्रीन बेल्ट तथा बगीचे की जमीन में आती है। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट केंद्र सरकार, राज्य सरकार, ग्राम निवेश और शहरी विकास प्राधिकरण के शासकीय दस्तावेजों में शहर की ग्रीन बेल्ट की जमीन चिन्हित और अंकित की गई है और दर्शाई गई है, जिसके अनुसार यहां किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। शहर में यह भी जन चर्चा है कि पीपीपी मोड वाली जमीन पर नगरपालिका झाबुआ के पास अधिकृत जमीनी दस्तावेज भी है या नहीं है। बताया जाता है कि राजशाही के समय झाबुआ राजा के भाई बहादुरसिंह राठौर द्वारा यह जमीन चाचा नेहरू बालोद्यान के लिए दान दी गई थी, इस जमीन के पास 12 फीट का एक जीवित प्रकृति प्रदत्त नाला है। नाले के दोनों और जमीन शहरी विकास प्राधिकरण और नगर निवेश विभाग के रिकॉर्ड में ग्रीन बेल्ट के रूप में अंकित है। बताया जाता है कि नगरपालिका परिषद् द्वारा बिना सोचे-समझे दूरदर्शी दृष्टिकोण को भी नजर अंदाज करते हुए आर्थिक लाभ और करोड़ों रुपए अवैध रूप से कमाने की मंशा को लेकर ताबड़तोड़ यह प्रस्ताव पार्षदों पर दबाव डालकर पारित करने का प्रयास किया गया है, जो शहर में व्यापारियों के बीच विवादित बनता जा रहा है। नगरपालिका परिषद् में पदस्थ मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिलन पटेल की तानाशाही और मनमर्जी वाली हरकतों और कार्य पद्धति से शहर में परिषद् और नगरपालिका प्रशासन के खिलाफ जन-आक्रोश प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। शहर के सबसे बड़े व्यापारी संगठन जो जिले का भी नेतृत्व व्यापारी जगत में करता है सकल व्यापारी संघ द्वारा ऐतिहासिक रूप से शहर को 13 व्यापारियों के समर्थन में और नगरपालिका की कार्रवाई के विरुद्ध जाकर बंद करवाया गया था, उसके बाद भी नगरपालिका प्रशासन जनहित में कार्रवाई करने के बजाय जनविरोधी कार्रवाई करता जा रहा है।

जिसके चलते शहर में भाजपा संगठन और सरकार की परिषद् की इस जन विरोधी हरकत के कारण छवि धूमिल होती जा रहीं है। भाजपा के खिलाफ वातावरण बनता जा रहा है, जो आगामी नगरपालिका परिषद् के चुनाव से लगाकर विधानसभा चुनाव और जिले में भी अपना प्रभाव डालकर भाजपा को हानि पहुंचाने जैसा कार्य होगा।

शहर में यह भी चर्चा जनता के बीच में है कि भाजपा शासित नगरपालिका परिषद द्वारा 4 साल के भीतर अपने कार्यकाल में शहर के हित में कोई महत्वपूर्ण योजना और कार्य लागू नहीं किया गया, अब मात्र 8 या 9 महीने शेष बचे हैं उसमें जनता और शहर के विकास की याद आने लगी है। इस प्रकार की जन चर्चा विकराल रूप लेते जा रहीं है।

*पूंजीपतियों का बोलबाला हो रहा -* शहर में चर्चा है कि नगरपालिका परिषद् पूंजीपतियों के हाथ का खिलौना बन गई है।जिसके चलते जवाहरलाल नेहरू बालोद्यान की जमीन उनको सौंपकर उनको भी करोड़पति बनाने का प्रयास करने के साथ अपने आप को भी करोड़पति बनाने का प्रयास मात्र भर किया जा रहा है। इसमे जनहित कहीं से कहीं तक दिखाई नहीं पड़ रहा है। शहर के जानकारों का कहना है कि नगरपालिका परिषद् में स्वार्थ सिद्धि और धन पिपासा के चक्कर में 13 व्यापारियों की दुकानों को भी तोड़ दिया जाता है, तो इस स्थान पर सरकार की गाइडलाइन, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और हाईकोर्ट की गाइडलाइन तथा नगर निवेश और नगर विकास प्राधिकरण विभाग की गाइडलाइन के अनुसार इन 13 दुकानों का और धर्मशाला का भी नव निर्माण नहीं किया जा सकेगा ?

*5-5 लाख रुपए की मांग की गई थी -* शहर में यह भी चर्चा है कि नगरपालिका परिषद् के जवाबदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने 13 व्यापारियों से अवैध रूप से 5-5 लाख रुपएकी मांग की गई थी। मांग पूरी नहीं होने पर नगरपालिका के तथाकथित सभापति उपाध्यक्ष और अध्यक्ष व्यापारियों से बदला निकाल रहे है। इस प्रकार की शहर में जन चर्चा है। नगरपालिका परिषद् में विशेष सम्मेलन में इतना बड़ा निर्णय बहुमत के आधार पर तो कर लिया, परंतु उनकी हरकतों और कार्रवाई को देखते हुए यहीं अंदाजा लगाया जा रहा है कि बिना सोचे समझे और बिना पूर्व तैयारी के यह प्रस्ताव पूंजीपतियों के इसारे पर कर लिया गया, जो शहर में भाजपा के खिलाफ जा रहा है। संभागीय संगठन, प्रदेश संगठन, जिला भाजपा संगठन के साथ झाबुआ में निवासरत कैबिनेट मंत्री, नगरीय निकाय मंत्री और मुख्यमंत्री शहर के इस गंभीर मुद्दे को अपने संज्ञान में लेकर परिषद् द्वारा पूंजीपतियों के इशारे पर जो कृत्य किया जा रहा है और शहर की शांति भंग करने का प्रयास किया जा रहा है, उसके लिए कलेक्टर और नगरपालिका सीएमओ को सख्त निर्देश देकर इस प्रकार की कार्रवाई को स्थगित करने का निर्देश दे।

*पीपीपी मोड का प्रस्ताव समझ से परे -* भाजपा परिषद् ने घर बैठे बिठाये कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ बोलने का अवसर और मुद्दा दे दिया है जिसको कांग्रेस हर स्तर पर भुनाने का प्रयास परिषद् की इस बेवकूफी से कर रहीं है। संगठन के कर्णधार इस विषय को भी संज्ञान में ले। शहर के कुछ जागरूक नागरिक उपरोक्त पीपीपी मोड़ के प्रस्ताव को लेकर जिला दंडाधिकारी न्यायालय में नगरपालिका परिषद् के खिलाफ भी वाद लगाने के बारे में गंभीरता से प्रयास कर रहे है। ऐसी स्थिति में परिषद् के निर्णय की धज्जियां उड़ने का भी संकट सामने आ रहा है। बस स्टैंड की 17 दुकानों को लेकर जिला दंडाधिकारी न्यायालय में नगरपालिका परिषद् के खिलाफ पूर्व में निर्णय किया जाकर नगरपालिका परिषद् को 36 लाख का आर्थिक दंड और जुर्माना भी किया गया था और नाले के पास पीछे तक बनी हुई 4 से 5 फीट दुकानों को तोड़ने का निर्देश दिया गया था, उस पर आज तक नगर पालिका परिषद् में कोई गंभीर निर्णय नहीं लिया है। यह स्थिति इन जागरूक जनप्रतिनिधियों की जो नगर विकास का दावा कर 13 व्यापारियों को बर्बाद करने पर तुले है ?

*शहर में बना हुआ जनचर्चा का विषय -* शहर में चर्चा है कि पीपीपी मोड को बहुमत से पास करने के पीछे कांग्रेस, निर्दलीय और भाजपा के पार्षदों को तीन तथा कथित परिषद् के पदाधिकारियो द्वारा लाखों रुपए की राशि अवैध रूप से भेंट की गई है। इस प्रकार की भी जन चर्चा शहर में जोरों से चल रहीं है। पीपीपी मोड में नगर में चर्चा है कि इन संभावित पूंजीपतियों को नगरपालिका परिषद करोड़ों रुपए लेकर लाभ पहुंचाने का और नगरपालिका परिषद् की जमीन को बेचने का सौदा कर रहे है, जो नाम जनचर्चा के माध्यम से सामने आए है उसमें अलकेश बाकलिया, बबलू तोमर, गौरव पाठक और दो प्रतिनिधि परिषद के इसमें शामिल है। इस प्रकार 5 लोगों का यह सिंडिकेट बना है। जिसके माध्यम से करोड़ों की हेराफेरी की जाएगी ?

Next Post

59 लीटर अवैध शराब के साथ कार जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार

Sun Jul 19 , 2026
छिंदवाड़ा । चौरई थाना पुलिस ने अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 59.40 लीटर देशी और अंग्रेजी शराब जब्त की है। पुलिस ने शराब से भरी एक इंडिगो कार को भी कब्जे में लिया है। जब्त शराब की कीमत करीब 45 हजार रुपए आंकी गई है। मामले […]

You May Like