चेन्नई, 10 जुलाई (वार्ता) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने पिछले वर्ष 27 सितंबर को हुए भीषण करूर भगदड़ हादसे के लिए शुक्रवार को सीधे तौर पर पुलिस और तत्कालीन द्रमुक सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
श्री विजय ने पीड़ितों के सम्मान में एक स्मारक के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक भविष्य की पीढ़ियों को ऐसी त्रासदियों को रोकने की याद दिलाता रहेगा। इस हादसे में 41 लोगों की जान गयी थी।
करूर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए श्री विजय ने अपने पुराने आरोप को दोहराया कि यह भगदड़ उन्हें फंसाने की एक साजिश थी। उन्होंने कहा, “ पीड़ितों के सम्मान में एक स्मारक बनाया जाएगा जो आने वाली पीढ़ी को उस साजिश की याद दिलाएगा जिसके कारण यह त्रासदी हुई। इसका उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके और उनका राजनीतिकरण न हो। ”
इस जानलेवा भगदड़ के बाद करूर के अपने पहले दौरे पर उन्होंने कहा, “ कोई भी सफलता मासूम जिंदगियों के जाने से हुए दर्द को नहीं मिटा सकती। इंसान चाहे किसी भी ऊंचाई पर पहुंच जाये, कुछ दर्द और जख्म कभी नहीं जाते। करूर की त्रासदी मुझे सबसे ज्यादा चोट पहुंचाती है। मैंने न केवल अपनी बड़ी और छोटी बहनों को खोया है, बल्कि मासूम बच्चों को भी खोया है।”
साजिश के अपने आरोप को सही ठहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “करूर से पहले की अन्य सभी रैलियां शांतिपूर्ण और दुर्घटनामुक्त रही थीं। जब मैं त्रिची रैली के बाद पेरम्बलूर जाने वाला था, तो पुलिस ने वहां अभूतपूर्व भीड़ का हवाला देते हुए कार्यक्रम रद्द करने को कहा था। लेकिन जब मैं नमक्कल से करूर के लिए निकल रहा था, तो ऐसा कोई अलर्ट नहीं दिया गया। अगर वे चाहते तो कार्यक्रम रद्द कर सकते थे। यह पुलिस ही थी जो मुझे राजमार्ग से कार्यक्रम स्थल तक ले गयी। क्या नाटक था! मैंने भी इस पर विश्वास किया और अपने भाषण में उन्हें धन्यवाद दिया।”
पुलिस ने किसके आदेश पर इस कार्यक्रम को संभाला, इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा, “ इस सबके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या इतनी बड़ी भीड़ के लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान की गयी थी?” उन्होंने कहा, “ जब मैं दर्द से तड़प रहा था, तो उन्होंने (द्रमुक) मुझ पर भाग जाने का आरोप लगाया। उन्होंने मेरा मज़ाक उड़ाया। लेकिन मेरे लिए लोगों से बढ़कर कुछ भी नहीं है। आप सभी ने वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में उन लोगों को करारा जवाब दिया है जिन्होंने हम सभी को ऐसा दर्द दिया। लेकिन यह काफी नहीं है। यह प्रहार ऐसा होना चाहिए कि वे कभी भी इससे उबर न पायें।”
इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दल द्रमुक को विधानसभा उपचुनाव का सामना करने की चुनौती दी।
मुख्यमंत्री ने भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों के 32 लाभार्थियों को नौकरी के नियुक्ति पत्र भी वितरित किये। इससे पहले दिन में, मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति पत्र देने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने हालांकि कहा कि अभी केवल अस्थायी नियुक्तियां ही की जा सकती हैं।
