ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों और धर्मगुरुओं ने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने का आह्वान किया

तेहरान, 10 जुलाई (वार्ता) ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों और धर्मगुरुओं ने जवाबी कार्रवाई का दम भरते हुए चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब “जवाबी कार्रवाई” से दिया जाएगा।

यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस सुझाव के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर तनाव और बढ़ता है तो अमेरिका ईरान के बिजली उपकरण निर्माण संयंत्रों, बिजली घरों और खारे पानी को मीठा बनाने वाले बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बगेर ज़ोलघाद्र ने चेतावनी दी कि देश के बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा।

श्री ज़ोलघाद्र ने एक बयान में कहा, “बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का जवाब समान कार्रवाई से दिया जाएगा, और इन आक्रामक कार्रवाइयों के पीछे छिपे इजराइल को हमारे लड़ाकों के जवाब से बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने श्री ट्रंप पर भी हमला बोलते हुए उन्हें “दुनिया का सबसे घृणित व्यक्ति” कहा और ईरानी जनता को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों की तीखी निंदा की।

इस बीच, कई वरिष्ठ धर्मगुरुओं ने शुक्रवार की नमाज के दौरान सार्वजनिक बयान जारी कर दिवंगत सर्वोच्च नेता की हत्या का बदला लेने को “राष्ट्रीय और धार्मिक कर्तव्य” बताया। कौम इलाके में शुक्रवार की नमाज के नेता अलीरेजा अराफी ने कहा कि श्री खामेनेई के लिए आयोजित बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार समारोहों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “शहीद नेता के विशाल अंतिम संस्कार ने दुनिया को ईरानी राष्ट्र की ‘खून का बदला’ लेने की कानूनी और धार्मिक मांग का संदेश दिया है।”

इस क्षेत्र में ईरान के सहयोगी सशस्त्र समूहों के नेटवर्क के कमजोर होने के सुझावों को खारिज करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि तथाकथित “प्रतिरोध मोर्चा” सक्रिय बना हुआ है और इसका विस्तार जारी रहेगा। शिराज में शुक्रवार की नमाज के अंतरिम नेता आदेल हाजीपुर ने कहा कि श्री खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देना एक राष्ट्रीय मांग बनी हुई है।

उन्होंने कहा, “ईरानी राष्ट्र की निश्चित मांग नेता के लिए ‘खून का बदला’ लेना है, और जिन्होंने उनकी हत्या को अंजाम दिया और इसका आदेश दिया, उनका विनाश ईरानी राष्ट्र की सार्वजनिक मांग है।” श्री हाजीपुर ने यह भी दावा किया कि पूर्व नेता के अंतिम संस्कार समारोहों में चार करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया, और यह भीड़ सार्वजनिक एकता को प्रदर्शित करती है।

इसी तरह, शहर-ए-खोर्द में शुक्रवार की नमाज के नेता अबुलहसन फातेमी ने घोषणा की कि हर हफ्ते होने वाली नमाज में बदले की मांग को लगातार दोहराया जाएगा। श्री फातेमी ने कहा, “अब से हर शुक्रवार को, नमाज के आयोजन के साथ, हम बदला और खून का बदला लेने की मांग उठाएंगे।”

उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों से बदला लेना इस इस्लामिक गणराज्य की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। तेहरान में शुक्रवार की नमाज के अंतरिम नेता मोहम्मद हसन अबूतोराबी फर्द ने ईरान और इराक में हुए अंतिम संस्कार समारोहों को “एकता और लचीलेपन का प्रदर्शन” बताया।

उन्होंने कहा, “ईरान और इराक के महान राष्ट्र द्वारा निर्मित यह महान, ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी घटना सामूहिक धैर्य की अभिव्यक्ति थी।” उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं ने व्यापक मुस्लिम जगत को मजबूत किया है। देश के सैन्य नेताओं ने भी इस बदले के संदेश को दोहराया, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडर अहमद वाहिदी ने कहा कि आयतुल्ला की मौत से ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी कमजोर नहीं होंगे।

श्री वाहिदी ने कहा, “अमेरिका के आपराधिक नेताओं और इस्लामिक क्रांति तथा प्रतिरोध मोर्चे के सभी दुश्मनों को पता होना चाहिए कि इस दिव्य नेता की हत्या करके वे कभी भी इस ईश्वरीय प्रकाश को बुझा नहीं पाएंगे, विश्वासी राष्ट्रों के संकल्प को कमजोर नहीं कर पाएंगे, या प्रतिरोध के ध्वज को नीचे नहीं ला पाएंगे।” श्री खामेनेई की मौत को “नई एकता का स्रोत” बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही “एक निश्चित, वैध और अविस्मरणीय मांग” बनी रहेगी।

इसी तरह, ईरान के सेना प्रमुख अब्दोलरहीम मौसवी ने भी पूर्व सर्वोच्च नेता द्वारा तय किए गए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। श्री मौसवी ने अंतिम संस्कार समारोहों में ईरानियों की “ऐतिहासिक” भागीदारी के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए एक संदेश में कहा, “क्रांति के शहीद नेता का मार्ग पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।” उन्होंने कहा कि इस भारी भीड़ ने जनता और इस्लामिक क्रांति के आदर्शों के बीच एक स्थायी बंधन का प्रदर्शन किया है और साथ ही “दुश्मनों को एक स्पष्ट संदेश” दिया है।

 

 

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