राजस्थान विस के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में 15 जुलाई को विस में होगा सम्मेलन का आयोजन

जयपुर, 10 जुलाई (वार्ता) राजस्थान विधानसभा अपने गौरवशाली 75 वर्ष के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव मना रही है और इसके तहत 15 जुलाई को सदन में एक सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा, जिसके उद्धाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एवं समापन सत्र में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि होंगे और इसमें वर्तमान एवं पुराने विधायकों सहित करीब सात सौ लोग भाग लेंगे। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शुक्रवार को यहां प्रेस वार्ता में बताया कि कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शरीक होंगे। इस ऐतिहासिक समागम में राज्य के वर्तमान 200 विधायकों एवं 495 पूर्व विधायकों को आमंत्रित किया गया है। अब तक सम्मेलन में भाग लेने के लिए 272 पूर्व विधायकों की स्वीकृति मिल चुकी है। इस समागम का मुख्य उद्देश्य अनुभवों को साझा करने के साथ-साथ विभिन्न विधान सभाओं के कार्यकाल के दौरान पारित उन ऐतिहासिक एवं जनहितैषी कानूनों पर चर्चा करना है, जिन्होंने राजस्थान नवनिर्माण की मजबूत आधारशिला रखी।
उन्होंने बताया कि 15 जुलाई को अमृत उत्सव के पहले कार्यक्रम में राजस्थान की पहली से सोलहवीं विधानसभा तक के पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों का विशाल सम्मलेन होगा। इसमें लोकतंत्र की ऐतिहासिक यात्रा को जीवंत किया जाएगा। इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण एवं उत्कृष्ट कानूनों, सामाजिक परिवर्तनकारी निर्णयों और संसदीय परंपराओं की समीक्षा की जाएगी। समारोह में पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और वरिष्ठतम सदस्यों का विशेष सम्मान होगा।

समारोह में पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों, छह बार या इससे अधिक बार तक के विधायकों और वर्तमान विधायकों का सम्मान किया जायेगा। उन्होंने बताया कि पूर्व विधानसभा अध्यक्षों में शांतिलाल चपलोत, सुमित्रा सिंह, दीपेन्द्र सिंह शेखावत, कैलाश चन्द मेघवाल और डॉ. सी पी जोशी, पूर्व उपाध्यक्षों में तारा भण्डारी, रामनारायण मीणा और राव राजेन्द्र सिंह को सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि छह या इससे अधिक बार के पूर्व विधायकों में सुमित्रा सिंह (नौ बार विधायक ), गुलाब चन्द कटारिया ( आठ बार) प्रद्युम्न सिंह (आठ बार) नारायण सिंह (सात बार), देवी सिंह भाटी (सात बार), राजेन्द्र राठौड़ (सात बार), कैलाश चन्द मेघवाल (छह बार) , फतेह सिंह (छह बार), घनश्याम तिवाड़ी (छह बार), हेमाराम चौधरी (छह बार), डॉ. बी डी कल्ला (छह बार), महादेव सिंह (छह) बार), परसराम मोरदिया (छह बार) और परसादीलाल मीणा (छह बार) को सम्मानित किया जायेगा।
वर्तमान विधायकों में कालीचरण सराफ (आठ बार), डॉ दयाराम परमार (सात बार), प्रताप सिंह सिंघवी (सात बार), राजेन्द्र पारीक (छह बार), अशोक गहलोत (छह बार), डॉ किरोड़ी लाल मीणा (छह बार), वसुन्धरा राजे ( छह बार), श्रवण कुमार (छह बार), मदन दिलावर (छह बार) और पुष्पेन्द्र सिंह (छह) बार) को सम्मानित किया जायेगा।

श्री देवनानी ने बताया कि इसमें लोकतंत्र के सफर के अनुभव और चुनौतियों, विधायी विरासत, सदन की गरिमा और विधान सभा के डिजिटल रुपान्तरण पर भी सम्मेलन में चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि समारोह का सजीव प्रसारण राजस्थान विधानसभा के यूटयूब चैनल पर किया जायेगा। राजस्थान की विभिन्न विधानसभाओं में पारित 23 कानूनों पर पूर्व स्पीकर, पूर्व डिप्टी स्पीकर, पूर्व मंत्रीगण चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस एक दिवस के कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सत्रों में राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्गृहण अधिनियम, 1952, राजस्थान जमींदारी एवं बिस्वेदारी उन्मूलन अधिनियम, 1959, राजस्थान कृषि लगान नियंत्रण अधिनियम, 1954, राजस्थान अभिधृति अधिनियम, 1955, राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद् अधिनियम, 1959, राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964, राजस्थान विधान सभा सदस्य (निर्हरता निवारण) अधिनियम, 1969, राजस्थान लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम, 1973, राजस्थान कृषि जोतों पर अधिकतम सीमा अधिरोपण अधिनियम, 1973, राजस्थान पासबुक (कृषि जोत) अधिनियम, 1983, राजस्थान गौशाला अधिनियम, 1958, राजस्थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्थाई प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 1995, राजस्थान अत्यावश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम, 1970 और राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी विधेयक, 2011 कानूनों पर चर्चा कराई जायेगी।

इसी प्रकार राजस्थान राज वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2005, राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012, राजस्थान प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023, राजस्थान कोचिंग सेन्टर (नियंत्रण और विनियमन) अधिनियम, 2025, राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025, राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2001, राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम, 1965, राजस्थान भूदान यज्ञ अधिनियम, 1953 और राजस्थान ग्रामदान अधिनियम, 1971 कानूनों पर भी चर्चा करायी जायेगी।

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