
जबलपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (प्लस 2.0) में भ्रष्टाचार और धांधली का एक बड़ा मामला मझौली जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत देवरी अमगवा से सामने आया है। सरकारी सिस्टम की अंधेरगर्दी से परेशान होकर शुक्रवार की दोपहर जब दर्जनों ग्रामीण अपनी गुहार लगाने जनपद कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनका खून खौल गया। जनता के टैक्स से मोटी तनख्वाह उठाने वाले साहब और बाबू दफ्तर से गायब थे। ज्ञापन थामने के लिए भी कोई जिम्मेदार कुर्सी पर मौजूद नहीं था। इसके बाद जनपद परिसर में ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जमकर नारेबाजी की।
सर्वे में खेल: गरीबों की छंटनी, रसूखदारों की ‘एंट्री’
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और ज्ञापन के अनुसार, देवरी अमगवा में पीएम आवास प्लस योजना के तहत पहले 251 परिवारों का बकायदा सर्वे किया गया था। ये वो लोग थे जो कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। लेकिन जब अंतिम सूची का प्रकाशन हुआ, तो ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
काटे गए नाम: 125 (लगभग 50% से अधिक गरीबों के नाम सूची से गायब)
बचे हुए नाम: 134 (अंतिम सूची में दर्ज नाम)
बड़ा आरोप: ग्रामीणों ने खुलेआम आरोप लगाया है कि जिन 134 लोगों के नाम पास किए गए हैं, उनमें से कई लोग संपन्न हैं, पक्के मकानों के मालिक हैं और योजना के मापदंडों के हिसाब से अपात्र हैं। सांठगांठ के चलते अपात्रों को सूची में चमका दिया गया और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले 125 गरीबों को लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
‘लाटसाहब’ ही नदारद मिले: दफ्तर बना भूतिया बंगला
अपनी कटी हुई छतों और अधूरे सपनों की फरियाद लेकर जब पीड़ित ग्रामीण जनपद पंचायत कार्यालय मझौली पहुंचे, तो वहां प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखने को मिली। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से लेकर अन्य जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी अपनी कुर्सियों से गायब थे। काफी देर तक ग्रामीण इधर-उधर भटकते रहे कि कोई उनका ज्ञापन ले ले, लेकिन दफ्तर में सन्नाटा पसरा हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, मझौली जनपद में अधिकारियों का गायब रहना अब आम बात हो चुकी है।
इन ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा, दी चक्काजाम की चेतावनी
इस पूरी धांधली के खिलाफ देवरी अमगवा के ग्रामीणों ने एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ज्ञापन सौंपने और प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से राजकुमार, उमा मेहरा, रजनी मेहरा, सरोज, सपना मेहरा, रसलेश साहू, राजेंद्र कुमार सोनी, चंदन मेहरा, प्रहलाद मेहरा, आशीष तिवारी, नन्नू कुमार सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग शामिल थे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
अंतिम सूची को तत्काल निरस्त किया जाए और देवरी अमगवा में दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए। जानबूझकर गरीबों के नाम काटने वाले दोषी सचिव, जीआरएस और जांच अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। सूची में शामिल किए गए संपन्न और अपात्र लोगों के नाम तुरंत हटाए जाएं।
ग्रामीणों ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर इस फर्जीवाड़े पर रोक लगाकर पुनः जांच शुरू नहीं की गई, तो समस्त ग्रामवासी जबलपुर-सिहोरा मार्ग पर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जनपद प्रशासन की होगी।
इस मामले में जब जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनका फोन ‘नॉट रीचेबल’ आया या उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
इनका कहना है
हम अपना मजदूरी का काम छोड़कर, किराया लगाकर यहां साहब को अपनी व्यथा सुनाने आए थे। लेकिन यहां तो पूरा दफ्तर ही खाली पड़ा है। गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं है। अपात्रों से पैसा खाकर हमारे नाम काटे गए हैं, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
राजकुमार एवं चंदन मेहरा (पीड़ित ग्रामीण)
