नयी दिल्ली, 10 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने आपराधिक मामलों की सुनवाई समय पर पूरी करने में विफल रहने और इसके बावजूद जमानत याचिकाओं का विरोध करने पर पंजाब और महाराष्ट्र की सरकारों की शुक्रवार को फटकार लगायी। न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने मुकदमे के निपटने में अत्यधिक देरी के बावजूद जमानत का विरोध करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की। न्यायाधीशों ने कहा कि आरोपी चार वर्ष से अधिक समय से हिरासत में है, जबकि आरोप पत्र में दर्ज 45 गवाहों में से अब तक केवल दो गवाहों से ही पूछताछ की जा सकी है।
यह टिप्पणी वर्ष 2022 के एक हत्या के मामले में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार हुए एक विदेशी नागरिक केल्विन चिन्दोज़ी ओकोरो के मामले में आई है। पीठ ने जमानत का कड़ा विरोध करने लेकिन त्वरित सुनवाई सुनिश्चित न कर पाने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार को इस देरी का कारण बताते हुए एक हलफनामा दायर करने और अभियोजन पक्ष की कमियों के कारण होने वाली लंबी कैद को रोकने के लिए एक नीति तैयार करने का निर्देश दिया। इससे पहले गुरुवार को, इसी पीठ ने पंजाब के एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया था। हालांकि, पीठ ने निर्देश दिया कि इस जुर्माने की वसूली तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि राज्य सरकार इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं कर देती।

