भोपाल। यात्रियों की सुरक्षा के साथ मानवीय सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश शासन रेलवे पुलिस (जीआरपी) द्वारा संचालित विशेष अभियान ‘ऑपरेशन हमदर्द’ के तहत रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, लापता एवं जरूरतमंद लोगों की पहचान कर उन्हें परिवारों से मिलाने और पुनर्वास दिलाने का अभियान लगातार सफल हो रहा है। एक जुलाई से 31 जुलाई तक चल रहे इस अभियान के अंतर्गत अब तक 270 संवेदनशील व्यक्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेल) राजाबाबू सिंह के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक (रेल), भोपाल अंकित जायसवाल के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे अभियान के आठवें दिन 32 लोगों की पहचान कर उनका डिजिटल दस्तावेजीकरण किया गया। इनमें 26 पुरुष, पांच महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं। जिन व्यक्तियों के परिजनों का पता चल सका, उन्हें परिवारों से मिलाया गया, जबकि अन्य को पुनर्वास के लिए सामाजिक संस्थाओं और आश्रय गृहों के सुपुर्द किया गया।
अभियान के दौरान कई भावनात्मक पुनर्मिलन भी हुए। आमला रेलवे स्टेशन पर दो वर्षों से बेसहारा जीवन जी रहे एक बुजुर्ग को नागपुर निवासी उनकी बेटी से मिलाया गया। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मानसिक रूप से परेशान राजस्थान के एक व्यक्ति, जिसकी गुमशुदगी नासिक में दर्ज थी, को उसके परिवार तक पहुंचाया गया। वहीं ग्वालियर में परिजनों से बिछड़े 11 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके पिता के सुपुर्द किया गया।
जीआरपी अधिकारियों का कहना है कि तैयार किया जा रहा डिजिटल डाटाबेस भविष्य में लापता व्यक्तियों की तलाश, संगठित भिक्षावृत्ति पर नियंत्रण तथा मानवीय पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
