लंदन, भारतीय टेनिस के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। पुणे के 18 वर्षीय प्रतिभावान खिलाड़ी अर्णव पापरकर ने जूनियर विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर 36 साल का लंबा इंतजार खत्म कर दिया है। उन्होंने जापान के र्यों तवाता को मात्र 52 मिनट में सीधे सेटों में 6-2, 6-1 से करारी शिकस्त दी। महान खिलाड़ी लिएंडर पेस के बाद क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले वे पहले भारतीय बन गए हैं। इस जीत से पहले उन्होंने वर्ल्ड नंबर 3 खिलाड़ी कीटन हैंस को हराकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर किया था।
संघर्ष और प्रतिभा का सफर
बिना किसी खेल पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले अर्णव का टेनिस का सफर एक संयोग से शुरू हुआ। तैराकी अभ्यास के दौरान टेनिस कोर्ट को देख उनमें खेल के प्रति रुचि जगी और मात्र 6 वर्ष की आयु में उन्होंने रैकेट थाम लिया। उनके माता-पिता ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए न केवल उनके अंतरराष्ट्रीय दौरों का खर्च उठाया, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर के लिए तैयार करने हेतु स्पेन में विशेष ट्रेनिंग का भी प्रबंध किया। यह अर्णव के अटूट जुनून और परिवार के कड़े परिश्रम का ही परिणाम है कि वे आज विश्व मंच पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
शीर्ष स्तर पर लगातार प्रदर्शन
अर्णव पापरकर का करियर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा है। 2023 की ऑस्ट्रेलियन ओपन अंडर-14 एलीट ट्रॉफी से लेकर 2026 में रोलां गैरो के तीसरे राउंड तक पहुंचने तक, उन्होंने अपनी निरंतरता साबित की है। वे 21 हफ्तों तक एआईटीए (AITA) अंडर-18 नेशनल नंबर 1 खिलाड़ी रहे और वर्तमान में दुनिया के टॉप 20 जूनियर खिलाड़ियों में शुमार हैं। अब क्वार्टर फाइनल में अर्णव का मुकाबला यूएसए के जॉर्डन ली या तनिष्क कोंडूरी से होगा, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

