
भोपाल। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव कुणाल चौधरी ने बुधवार को नर्मदा नदी से जुड़े जल अधिकारों के मुद्दे पर राज्य सरकार पर मध्य प्रदेश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए नर्मदा जल बंटवारे, परियोजनाओं और मुआवजे से जुड़े सभी निर्णयों पर तत्काल श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
पत्रकार वार्ता में कुणाल चौधरी ने कहा कि नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने मध्य प्रदेश को 18.25 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी आवंटित किया था, लेकिन भाजपा सरकार दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राज्य के हिस्से का पूरा उपयोग नहीं कर सकी है। उनका दावा था कि वर्तमान में केवल लगभग 12 एमएएफ पानी का ही उपयोग हो रहा है, जबकि कई प्रमुख सिंचाई और जल भंडारण परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं या बंद कर दी गई हैं।
उन्होंने कल केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई अंतरराज्यीय बैठक पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सरकारी भूमि के डूब क्षेत्र के एवज में मिलने वाले 7,669 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा छोड़ दिया और इसके बजाय गुजरात को 550 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई। उन्होंने इसे प्रदेश के हितों के साथ विश्वासघात बताया।
कुणाल चौधरी ने बरगी डायवर्जन परियोजना में देरी और लागत वृद्धि को प्रशासनिक विफलता तथा भ्रष्टाचार का परिणाम बताते हुए कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित हजारों आदिवासी परिवार आज भी समुचित पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार से नर्मदा की लंबित परियोजनाओं, सिंचाई क्षमता, पुनर्वास कार्यों तथा राज्य को आवंटित पूरे जल हिस्से के उपयोग की कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की।
