नई दिल्ली, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम में महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जिससे नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब तक किसी दूसरे राज्य में 12 महीने से अधिक समय तक वाहन रखने पर नया रजिस्ट्रेशन नंबर लेना अनिवार्य था, लेकिन अब इस समय सीमा को बढ़ाकर 3 साल किया जा रहा है। यह नियम उन लोगों के लिए बेहद मददगार होगा जो सीमित अवधि के असाइनमेंट पर दूसरे राज्यों में जाते हैं और फिर वापस अपने गृह राज्य लौट आते हैं।
डिजिटल समाधान और अदालतों पर कम बोझ
वाहनों के पंजीकरण के अलावा, सरकार ट्रैफिक चालान से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी आसान बनाने जा रही है। अब छोटे-मोटे ट्रैफिक अपराधों को ‘डिक्रिमिनलाइज’ किया जा रहा है, जिससे मामलों को बार-बार कोर्ट भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए सभी राज्यों को 6 महीने के भीतर एक डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तैयार करना होगा, ताकि जुर्माने का निपटारा ऑनलाइन या नामित अधिकारियों के स्तर पर ही हो सके। इससे अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
रोड टैक्स एकीकरण की आवश्यकता
हालांकि, पंजीकरण की समय सीमा बढ़ना स्वागतयोग्य है, लेकिन विशेषज्ञ इसे समस्या का आंशिक समाधान मान रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में रोड टैक्स की अलग-अलग दरें अभी भी वाहन मालिकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। सही मायने में राहत तभी मिलेगी जब ‘वाहन पोर्टल’ के माध्यम से राज्यों के बीच रोड टैक्स ट्रांसफर की ऑनलाइन सुविधा और एकसमान कर ढांचा लागू किया जाएगा। फिलहाल, सरकार का यह कदम आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा सकारात्मक प्रयास है।

