झोलाछाप ने लगाया था मासूम बालिका को इंजेक्शन, पांच दिन कोमा में रहने के बाद मौत

सीहोर।प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले सिरप से हुई मासूम बच्चों की मौत के बाद परिजनों के आंसू भी नहीं सूखे थे कि शहर के समीपस्थ ग्राम बरखेड़ी के एक झोलाछाप डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगाते हुए दो वर्षीय एक मासूम बालिका की जिंदगी पर विराम लगा दिया. पहले जिला अस्पताल फिर भोपाल के निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने वाली मासूम आज जिंदगी की जंग हार गई. परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही से गलत इलाज करने का आरोप लगाया है.

पांच दिन से कोमा में पड़ी अपनी मासूम बेटी की कुशलता व जिंदगी के लिए भगवान से कातर प्रार्थना कर रहे ग्राम पीपलिया मीरा के कन्हैयालाल कुशवाह का परिवार आज उस वक्त पूरी तरह टूटकर बिखर गया जब पांच दिन बाद उनकी दो वर्षीय मासूम बालिका दीक्षा ने हमेशा हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर लीं. परिजनों की मानें तो वह गत दो अक्टूबर को मामूली खांसी- बुखार होने के कारण ग्राम बरखेड़ी स्थित मुस्कान क्लीनिक लेकर गए थे. वहां मौजूद डॉ. अशोक विश्वकर्मा द्वारा दीक्षा को इंजेक्शन लगाया. उसके बाद से दीक्षा कोमा में चली गई व उसकी तबीयत और खराब हो गई. परिजन उसे जिला अस्पताल लाए, लेकिन उसकी तबीयत लगातार खराब होती जा रही थी. परिजन उसे शाम को भोपाल के एक निजी अस्पताल ले गए. जहां लगातार पांच दिन तक मौत से जूझते हुए मासूम दीक्षा ने आखिर हार मान ली और हमेशा के लिए चिरनिद्रा में सो गई.

इस मामले में थाना कोतवाली प्रभारी रविन्द्र यादव ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी. जबकि इस संबंध में सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया का कहना है कि मामले में जांच कराई जाकर जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी. इस घटना के बाद से ग्राम पीपलिया मीरा में शोक का माहौल बना हुआ है. वह डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

लगातार पांच साल से जमे हैं सीएमएचओ डॉ. डेहरिया

वर्ष 2020 में कोरानाकाल के दौरान डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया द्वारा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का पदभार ग्रहण किया था. उनके संपूर्ण कार्यकाल में कई फर्जी अस्पताल व नर्सिंग होम संचालित होने के गंभीर मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा आवश्यक कार्रवाई करने में हमेशा लापरवाही बरती जाती रही है. नतीजतन उनकी लचर कार्यप्रणाली को देखते हुए आम लोगों में उनके प्रति आक्रोश का माहौल बना हुआ है. सूत्रों की मानें तो पूर्व में भी बरखेड़ी स्थित मुस्कान क्लीनिक पर लापरवाही के मामले सामने आए थे. इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर प्रवीण सिंह अढायच द्वारा सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया को क्लीनिक की जांच करने के आदेश भी दिए थे, लेकिन सीएमएचओ द्वारा ढिलाई बरती गई. नतीजतन अनुभवहीन डॉक्टर अशोक विश्वकर्मा भोले- भाले ग्रामीणों का उपचार करता रहा और उसके गलत उपचार के कारण मासूम बालिका दीक्षा को जिंदगी गंवाना पड़ गई.

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