
भारतीय नर्स पर हत्या का आरोप, सुप्रीम कोर्ट में अंतिम अपील; परिवार और सामाजिक संगठनों को केंद्र सरकार से बड़ी मदद की उम्मीद, खून के पैसे जुटाने का अभियान जारी।
एर्नाकुलम, 14 जुलाई, 2025 (नवभारत): यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के लिए आज एक बेहद अहम दिन है। हत्या के एक मामले में यमनी अदालत से मौत की सजा पाए निमिषा प्रिया की फांसी टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अंतिम अपील पर सुनवाई आज होने जा रही है। भले ही निमिषा के जीवन को बचाने की उम्मीदें अब बहुत कम बची हैं, लेकिन अंतिम समय तक भी वह अपनी हिम्मत नहीं हारी हैं। दूसरी ओर, उनके परिवार, विभिन्न सामाजिक संगठन और सरकार वैश्विक स्तर पर उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
यह पूरा मामला 2017 का है, जब निमिषा प्रिया पर एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप लगा था। निमिषा पर आरोप है कि उन्होंने महदी को नशे का इंजेक्शन दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। निमिषा का कहना है कि महदी ने उनका पासपोर्ट छीन लिया था और उन्हें प्रताड़ित कर रहा था, जिसके कारण उन्होंने आत्मरक्षा में यह कदम उठाया। यमन की निचली अदालत और फिर अपील अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। अब उनकी अंतिम उम्मीद यमन के सुप्रीम कोर्ट में टिकी है, जहाँ ‘खून के पैसे’ (ब्लड मनी) के माध्यम से माफी की संभावना पर विचार किया जा सकता है। महदी के परिवार ने पहले भी खून के पैसे की मांग की है, लेकिन यह राशि बहुत बड़ी है, और निमिषा का परिवार इसे जुटाने में असमर्थ है।
खून के पैसे जुटाने का अभियान जारी, सरकार से हस्तक्षेप की गुहार; कानूनी और कूटनीतिक प्रयास तेज
निमिषा प्रिया के परिवार और ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ जैसे संगठनों ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और यमन सरकार पर राजनयिक दबाव बनाने का आग्रह किया है।
केंद्र सरकार भी इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है और यमनी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है। निमिषा के वकील और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार महदी के परिवार से बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि खून के पैसे की राशि पर समझौता हो सके। यह मामला न केवल एक भारतीय नागरिक की जान बचाने का है, बल्कि यह विदेशों में काम कर रही भारतीय महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों से भी जुड़ा है। आज की सुनवाई निमिषा प्रिया के भाग्य का फैसला कर सकती है, और पूरे देश की निगाहें यमनी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
