
नई दिल्ली। वर्ष 2025 में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बनने का गौरव प्राप्त किया है। यात्री वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड 45.5 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जो वर्ष 2024 की तुलना में 6 प्रतिशत अधिक है। वहीं, ऑटोमोबाइल निर्यात में भी जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 24 प्रतिशत उछलकर 63 लाख यूनिट तक पहुंच गया।
देश में कुल वाहन उत्पादन सालाना 2.8 से 3 करोड़ यूनिट के स्तर पर पहुंच चुका है। इस तेजी के पीछे राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार और केंद्र सरकार की नीतियों की अहम भूमिका मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई इथेनॉल ब्लेंडिंग, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को बढ़ावा देने वाली योजनाएं और निवेश-अनुकूल नीतियों ने ऑटो उद्योग को नई रफ्तार दी है।
इस उपलब्धि को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक उत्साह देखने को मिल रहा है। कई यूजर्स इसे भारत की आर्थिक मजबूती का प्रतीक बता रहे हैं। वहीं, यह उपलब्धि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘डेड इकॉनमी’ जैसे बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों का भी जवाब मानी जा रही है, जिस पर सोशल मीडिया में मीम्स और चर्चाएं तेज हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक ऑटो उद्योग में और भी मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।
