गणतंत्र दिवस पर 45 हस्तियों को पद्म श्री पुरस्कार का ऐलान

नयी दिल्ली। साहित्य एवं शिक्षा, कला, चिकित्सा, खेल, समाज सेवा और कृषि जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 45 हस्तियों को चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया है।

पद्म पुरस्कार पाने वाले इन गुमनाम नायकों ने साधारण होते हुए भी असाधारण योगदान दिया है। इन सभी विभूतियों ने गंभीर व्यक्तिगत कठिनाइयों और त्रासदियों को पार करते हुए न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की, बल्कि समाज की व्यापक सेवा भी की है। इनमें पिछड़े और दलित समुदायों, आदिम जनजातियों तथा दूरस्थ और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों से आने वाले व्यक्ति शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार पद्म श्री पुरस्कार पाने वाले इन नायकों में शामिल हैं-

1. अंके गौड़ा: साहित्य एवं शिक्षा, कर्नाटक

2. आर्मिडा फ़र्नांडीज़: चिकित्सा, महाराष्ट्र

3. भगवानदास रायकवाड़ : पारंपरिक खेल कोच, मध्य प्रदेश

4. भिखल्या लाडक्या ढिंडा : कला, महाराष्ट्र

5. बृज लाल भट्ट : समाज सेवा, जम्मू कश्मीर

6. बुधरी ताती : समाज सेवा, छत्तीसगढ

7. चरण हेम्ब्रम : साहित्य एवं शिक्षा, ओडिशा

8. चिरंजी लाल यादव : कला (ब्रास वर्क), उत्तर प्रदेश

9. धर्मिक लाल चुन्नीलाल : पांड्या कला, गुजरात

10. ग़फ़रुद्दीन मेवाती जोगी : कला, राजस्थान

11. हैली वार : समाज सेवा, मेघालय

12. इंदरजीत सिंह सिद्धू : समाज सेवा, चंडीगढ़

13. के. पाजनीवेल : कला, पुड्डुचेरी

14. कैलाश चंद्र पंत : साहित्य एवं शिक्षा, मध्य प्रदेश

15. खेम राज सुंद्रियाल : कला, हरियाणा

16. कोल्लक्कयिल देवकी अम्मा जी : पर्यावरण एवं वानिकी, केरल

17. कुमारस्वामी थंगराज : चिकित्सा, हैदराबाद

18. महेंद्र कुमार मिश्रा : साहित्य एवं शिक्षा, ओडिशा

19. मीर हाजीभाई कासमभाई : कला, गुजरात

20. मोहन नागर : पर्यावरणविद, मध्य प्रदेश

21. नरेश चंद्र देव वर्मा : साहित्य एवं शिक्षा, त्रिपुरा

22. निलेश विनोदचंद्र मंडलेवाला : समाज सेवा, गुजरात

23. नूरुद्दीन अहमद : कला, असम

24. ओथुवर तिरुथानी स्वामीनाथन : कला, तमिलनाडु

25. पद्मा गुरमेत : चिकित्सा, लद्दाख

26. पोखिला लेकथेपी: कला, असम

27. डा. पुन्नियामूर्ति नतेसन: पशु चिकित्सक, तमिलनाडु

28. आर. कृष्णन : कला, तमिलनाडु

29. रघुपत सिंह : कृषि, उत्तर प्रदेश

30. रघुवीर तुकाराम खेड़कर: कला, महाराष्ट्र

31. राजस्तपाठी कालीअप्पा गौंडर : कला, तमिलनाडु

32. रामा रेड्डी मामिडी: पशुपालन एवं डेयरी , तेलंगाना

33. रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले : चिकित्सा, छत्तीसगढ़

34. एस. जी. सुशीलम्मा: समाज सेवा, कर्नाटक

35. संग्युसांग एस. पोंगेनर : कला, नागालैंड

36. शफ़ी शौक़: साहित्य एवं शिक्षा, जम्मू कश्मीर

37. श्रीरंग देवाबा लाड: कृषि, महाराष्ट्र

38. श्याम सुंदर : चिकित्सा, उत्तर प्रदेश

39. सिमांचल पात्रो: कला, ओड़िशा

40. सुरेश हनगावाड़ी : चिकित्सा (स्वदेशी होम्योपैथी), कर्नाटक

41. तगा राम भील: कला, राजस्थान

42. तेची गुबिन: समाज सेवा, अरुणाचल प्रदेश

43. तिरुवारूर भक्तवत्सलम : कला, तमिलनाडु

44. विश्व बंधु : कला, बिहार

45. युमनाम जात्रा सिंह : कला, मणिपुर

ये वे लोग हैं जिन्होंने दिव्यांगजन, महिलाओं, बच्चों, दलितों और जनजातीय समुदायों की सेवा में स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य करते हुए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।

स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे हीमोफीलिया पर कार्य करने वाले चिकित्सकों से लेकर भारत का पहला मानव दुग्ध बैंक स्थापित करने वाले नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ तक सीमावर्ती राज्यों में भारत की स्वदेशी विरासत के संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने से लेकर जनजातीय भाषाओं और पारंपरिक मार्शल आर्ट्स के संवर्धन तक, लुप्तप्राय कला और बुनाई परंपराओं के संरक्षण से लेकर देश की पारिस्थितिक संपदा की रक्षा और स्वच्छता के अभियान को आगे बढ़ाने तक इस वर्ष के पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ता वास्तव में उन सामान्य भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो चुपचाप अपने दैनिक जीवन में भारत माता की सेवा में लगे हुए हैं।

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