भोपाल। मध्यप्रदेश संवर्ग 2025 बैच के आठ परिवीक्षाधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकार का उपयोग हमेशा विनम्रता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ किया जाना चाहिए।
सोमवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित संवादात्मक सत्र में डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण अवधि सीखने का सबसे महत्वपूर्ण समय होती है। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ कनिष्ठ कर्मचारियों के अनुभवों से भी सीखने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय का आधार अपुष्ट सूचनाएं नहीं, बल्कि तथ्यपरक और सत्यापित जानकारी होनी चाहिए। बदलती प्रशासनिक चुनौतियों के बीच निरंतर सीखने और नई परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी है।
कैलाश मकवाणा ने कहा कि अधिकारियों को नए आपराधिक कानूनों, साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध, मादक पदार्थ नियंत्रण तथा नशा विरोधी अभियानों की गहन जानकारी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन में आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग पर बल देते हुए जनजागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अपने सेवा अनुभव साझा करते हुए डीजीपी ने भीड़ प्रबंधन, सड़क सुरक्षा अभियानों तथा डायल-100 से एकीकृत आपातकालीन सेवा 112 में सफल बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों, नागरिक प्रशासन और आम जनता के समन्वित प्रयासों से वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश नक्सल चुनौती से मुक्त होने में सफल रहा।
डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों से प्रदेश में चल रहे ‘सेफ क्लिक 2.0’ साइबर जागरूकता अभियान तथा शीघ्र शुरू होने वाले ‘नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0’ अभियान में सक्रिय सहयोग देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से ही सुरक्षित, जागरूक और नशामुक्त समाज का निर्माण संभव है।
