
शाजापुर, नगरपालिका भ्रष्टाचार का चारागाह सदियों से बनी हुई है. जिसको जहां मौका मिलता है, इस चारागाह में भ्रष्टाचार की फसल काटने लग जाता है. नगर पालिका द्वारा वाहनों से दखल शुल्क वसूला जाता है. पहले इस शुल्क की राशि 10 रुपए प्रति वाहन थी, जिसे बढ़ाकर 20 रुपए प्रति वाहन कर दी. इस राशि से बस स्टैंड का रखरखाव होता है. ऐसा रसीद पर लिखा हुआ है. अब इसमें खेल यह है कि प्रतिदिन लगभग 200 गाडिय़ों से दखल शुल्क वसूला जाता है, लेकिन नगर पालिका में 30-40 गाडिय़ों का ही दखल शुल्क जमा होता है. बाकी पैसा जो कर्मचारी दखल शुल्क वसूल रहा है, उसकी जेब में जाता है.
गौरतलब है कि शाजापुर बस स्टैंड पर नगर पालिका द्वारा विभिन्न वाहनों से दखल शुल्क लिया जाता है. यूं तो इसका टेंडर होना चाहिए, लेकिन कई वर्षों से इसका टेंडर नहीं हुआ है. इसलिए ये काम नगर पालिका के कर्मचारी द्वारा किया जाता है. प्रति वाहन 20 रुपए के हिसाब से लिया जाता है और लगभग 200 गाडिय़ां प्रतिदिन निकलती हैं, जिनसे 20 रुपए प्रति गाड़ी के मान से दखल शुल्क की राशि वसूली जाती है. लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से आधी से ज्यादा गाडिय़ों को रसीद न देकर दो नंबर में छोड़ दिया जाता है. यदि अमूमन एक एवरेज की बात करें, तो 100 गाडिय़ों से यदि 20 रुपए के मान से दखल शुल्क की रसीद कटी, तो 2000 रुपए की आय कम से कम नगर पालिका को होना चाहिए, लेकिन नगरपालिका के पास दखल शुल्क रोज 1000 से ऊपर नहीं जाता है. तो बाकी पैसा कौन वसूल रहा है और किसकी जेब में जा रहा है.
वाहन ज्यादा है, नपा को कम मिल रही वूसली
बस स्टैंड पर जो बसों की एजेंटी करते हैं. उन्होंने नवभारत को बताया कि लगभग 150 वाहन शाजापुर से निकलते हैं, जो दखल शुल्क देते हैं. नपा के पूर्व कर्मचारी ने भी बताया कि पहले 120 वाहनों की रसीद काटी जाती थी, उस समय दखल शुल्क 10 रुपए हुआ करता था. जो कि अब 20 रुपए है और वे अब इस काम से हट गए हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है. सवाल यह उठता है कि यदि 150 से 200 वाहन से भी यदि 20 रुपए दखल शुल्क वसूला जा रहा है, तो नगरपालिका को 2 से 3 हजार की आय होना चाहिए, लेकिन नगर पालिका में दखल शुल्क हजार रुपए से ऊपर प्रतिदिन जमा होता है. तो बाकी पैसा कहां जा रहा है.
बस स्टैंड के रखरखाव में काम आता है दखल शुल्क
जो दखल शुल्क वसूला जाता है, उससे बस स्टैंड का रखरखाव किया जाता है, लेकिन उसके बाद भी बस स्टैंड का शौचालय इस बात का गवाह है कि कैसा रखरखाव किया जा रहा है. साथ ही बस स्टैंड पर भी जगह-जगह गंदगी देखी जा सकती है. अब देखना यह है कि बस स्टैंड के दखल शुल्क में कौन भ्रष्टाचार का दखल कर रहा है. ये जांच का विषय है.
इनका कहना है
दखल शुल्क का ठेका नहीं हुआ है. इसलिए नगर पालिका के कर्मचारी ही वसूल रहे हैं. प्रतिदिन कितना दखल शुल्क जमा हो रहा है. यह देखकर ही बता सकता हूूूं. – भूपेंद्र कुमार दीक्षित, सीएमओ-शाजापुर
