लापता विधायक के पोस्टर से गरमाई सियासत 

महाकौशल की डायरी अविनाश दीक्षित। छिंदवाड़ा की सियासत में बीते दिनों तब नया मोड़ आ गया जब वहां के ग्राम जैतपुर में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर लगाए गए लापता विधायक के पोस्टर सुर्खियां बने। मामला हालिया है जहां जैतपुर जैसे गांव के अनेक स्थानों में यह पोस्टर लगाए गए और उनके जरिए आरोप लगाए गए कि कमलनाथ क्षेत्र में ना तो आए हैं वरन जनता की समस्याओं से भी दूरी बनाए हुए हैं। दरअसल बारिश की लेट लतीफी से क्षेत्र में जल संकट आसन है और क्षेत्रीय विधायक होने के बावजूद कमलनाथ इस विषय को लेकर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। इन हालातों का फायदा भाजपा उठाने की जुगत में है। सर्वविदित है कि कमलनाथ की वजह से छिंदवाड़ा दशकों से कांग्रेस का मजबूत गढ़ बना रहा है, लेकिन बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत झोंकते हुए यहां अपना कब्जा जमा लिया था, उसके बाद से छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र की राजनीति में लगातार बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। नगरीय निकायों से लेकर पंचायत तक नए सियासती समीकरण बन रहे हैं। एक ओर भाजपा जहां अपनी पैठ को और मजबूत करने की कोशिश में लगी हुई है वहीं कांग्रेस अपने वोट बैंक को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। मौजूदा परिदृश्य इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

रादुविवि से विद्यार्थियों का हो रहा मोहभंग…

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से क्या विद्यार्थियों का मोह भंग हो रहा है…? यह सवाल विश्वविद्यालय की गलियारों में तेजी से कोंध रहा है। दरअसल प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुए दो माह बीत चुके हैं मगर रादुविवि के अधिकतर पाठ्यक्रमों की सीट अभी भी खाली पड़ी हुई हैं। चार दिन पूर्व तक कुल 5946 सीटों के मुकाबले महज 509 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है जबकि 5437 सीट अभी भी खाली पड़ी हुई हैं । लगभग 91 प्रतिशत रिक्त पड़ी सीटों से रादुविवि की प्रवेश रणनीति और शैक्षिक प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस बार प्रवेश प्रक्रिया को लेकर प्रचार प्रसार का अभाव, स्कूल कॉलेज में पहुंचकर विद्यार्थियों को पाठ्यक्रमों की जानकारी न देने को कारण माना जा रहा है। कम प्रवेश का असर विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा , यह तकरीबन तय हो चुका है, क्योंकि अधिकांश स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम छात्रों की फीस पर निर्भर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि रादुविवि प्रबंधन इस समस्या से कैसे निपट पाता है।

क्लोन मशीनों से बन गए आतंकियों के आधार..

हाल ही में हुए खुलासे से जबलपुर सहित संभाग के अनेक जिलों के लोगों की चिंता और बढ़ गई हैं। मामला बीएसएनल से जुड़ा है, जिसके दस्तावेजों में जिक्र है कि जबलपुर सहित संभाग के बालाघाट, मंडला, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा में भारतीय संचार निगम लिमिटेड की आधार मशीनों का अवैध उपयोग कर आतंकियों के आधार कार्ड बनाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि यह कुचक्र हालिया नहीं बल्कि 2023 से जारी है और वह भी प्रदेश के 15 जिलों में। सूत्रों के अनुसार 2023 के दिसंबर माह में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने एक पत्र बीएसएनएल को भेजा था, जिसमें उक्त जानकारी दी गई थी। पिछले दिनों भारतीय संचार निगम के मध्य प्रदेश के महाप्रबंधक मिथिलेश कुमार का दावा सार्वजनिक हुआ है कि भारतीय विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण का पत्र मिलने के बाद बीएसएनएल ने संबंधित मशीनों पर रोक लगा दी थी और यह सुनिश्चित किया गया कि मध्य प्रदेश के अधिकार क्षेत्र की कोई भी मशीन राज्य के बाहर काम नहीं कर सकेंगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार उनसे पूछा गया कि उपरोक्त जानकारी मिलने के बाद उनके विभाग द्वारा एफ आई आर क्यों दर्ज नहीं कराई गई, जिस पर महाप्रबंधक का कहना था कि इसका जवाब भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ही दे सकता है। मामले में चिंताजनक पहलू यह है कि इस मसले के सामने आने के बाद जो गंभीरता बरती जाना चाहिए थी वह अभी तक नदारत है।

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