‘अमेरिका फर्स्ट’ कूटनीति पर केंद्रित हैं ट्रंप, चीन और ईरान पर रहेगा कड़ा रुख : मार्को रुबियो

बीजिंग, 14 मई (वार्ता) अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका को टकराव से बचने के लिए राजनयिक जुड़ाव बनाए रखते हुए चीन के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना चाहिए।

श्री रुबियो ने ‘एयर फ़ोर्स वन’ पर शॉन हैनिटि के साथ एक विस्तृत साक्षात्कार में चीन को अमेरिका की “शीर्ष भू-राजनीतिक चुनौती” घोषित किया और चेतावनी दी कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं वैश्विक स्थिरता के लिए सीधा खतरा हैं।

श्री रुबियो ने कहा, “चीन का मानना है कि वह अमेरिका को पछाड़कर दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बन जाएगा, लेकिन अमेरिका चीन के इस उभार को अपनी कीमत पर नहीं होने देगा।”

उन्होंने व्यापार असंतुलन, बौद्धिक संपदा की चोरी, ताइवान, आपूर्ति-शृंखला निर्भरता और ईरान के साथ चीन के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि व्यापार पर अमेरिका का रुख बिल्कुल साफ है। अमेरिका को अपनी जरूरत की आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन खुद करने में सक्षम होना चाहिए, क्योंकि किसी भी अन्य देश पर पूरी तरह निर्भर रहना देश को कमजोर बनाता है।

उन्होंने चीन पर अमेरिकी नवाचारों की चोरी और रिवर्स इंजीनियरिंग का आरोप लगाया और कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी औद्योगिक क्षमता को वापस लाने तथा चीनी आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। ताइवान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बलपूर्वक यथास्थिति बदलना किसी के हित में नहीं है और वहां स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण है।

ईरान पर सख्त चेतावनी देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान का परमाणु हथियार हासिल करने का प्रयास “पूरी तरह से अस्वीकार्य” है और राष्ट्रपति ट्रंप अपने कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं होने देंगे।

उन्होंने चीन से फारस की खाड़ी में तनाव कम करने के लिए ईरान पर दबाव बनाने का आग्रह किया, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता वैश्विक व्यापार और खुद चीन की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका इस सप्ताह के अंत में संयुक्त राष्ट्र में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाइयों की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव पेश करेगा।

श्री रुबियो ने रूस और यूक्रेन संकट पर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीति के जरिए इस युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि मॉस्को और कीव दोनों ही वाशिंगटन को एकमात्र ऐसे देश के रूप में देखते हैं जो इस विवाद में मध्यस्थता करने में सक्षम है।

उन्होंने नाटो सहयोगियों का जिक्र करते हुए ईरान के साथ हालिया तनाव के दौरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक पहुंच से इनकार करने वाले कुछ सदस्य देशों की आलोचना की। उन्होंने इस मामले में स्पेन के रवैये को बेहद निराशाजनक बताया, जबकि अमेरिकी अभियानों का समर्थन करने के लिए पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया और बुल्गारिया की सराहना की।

उन्होंने लातिन अमेरिका के विषय पर कहा कि वेनेजुएला ने पिछले चार महीनों में लगातार प्रगति दिखाई है और वहां तेल राजस्व का ऑडिट कर उसे भ्रष्टाचार के बजाय सार्वजनिक वेतन के लिए भेजा जा रहा है। वहीं, क्यूबा को उन्होंने सैन्य अभिजात वर्ग द्वारा नियंत्रित एक बर्बाद और गैर-कार्यात्मक अर्थव्यवस्था बताया, जहां प्रचुर खनिज संपदा और समृद्ध कृषि भूमि होने के बावजूद लोग तरक्की नहीं कर पा रहे हैं।

श्री रुबियो ने नवनिर्वाचित अमेरिकी पोप, ‘पोप लियो’ के साथ अपनी हालिया बैठक का भी उल्लेख किया और कहा कि वेटिकन शांति को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, लेकिन राष्ट्रों को कभी-कभी ऐसे खतरों का सामना करना पड़ता है जिन्हें राजनयिक रूप से हल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि ट्रंप की विदेश नीति ‘अंतहीन युद्धों’ से बचने और राष्ट्रीय सुरक्षा या आर्थिक हितों को खतरा होने पर अमेरिकी शक्ति का निर्णायक रूप से उपयोग करने पर आधारित है।

 

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