पुड्डुचेरी, 02 जुलाई (वार्ता) पुड्डुचेरी में जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जिपमेर) के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने दर्दनाक ब्रैकियल प्लेक्सस चोट से पीड़ित दो मरीजों की रोबोटिक सहायता से कम चीर-फाड़ वाली फ्रेनिक तंत्रिका शल्य प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की।
आध्पिकारिक जानकारी के मुताबिक यह उपलब्धि दक्षिण भारत में दर्दनाक ब्रैकियल प्लेक्सस चोट के लिए पहली रोबोटिक सहायता से तंत्रिका का पुनर्निर्माण है। दोनों मरीज़ों की रोबोटिक सहायता से कम चीर-फाड़ वाली फ्रेनिक तंत्रिका शल्य प्रक्रिया की गयी, जिसके बाद कोहनी को मोड़ने की क्षमता बहाल करने के लिए फ्रेनिक तंत्रिका को मस्कुलोक्यूटेनियस तंत्रिका से जोड़ा गया।
डॉ. दिनेश कुमार एस के नेतृत्व वाली प्लास्टिक सर्जनों की एक टीम ने यह प्रक्रिया पूरी की। रोबोट ने छाती के भीतर सटीक खोज एवं डोनर तंत्रिका को मामूली नुकसान के साथ निकालने में मदद की जिससे शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ी और साथ ही ऊतकों की न्यूनतम क्षति हुई।
सर्जनों की टीम को बधाई देते हुए, प्रोफ. (डॉ.) वीर सिंह नेगी, निदेशक, जेआईपीएमईआर ने कहा कि यह मील का पत्थर संस्थान की मरीज देखभाल में सुधार के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जेआईपीएमईआर का बहु-विषयक रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम जून 2017 में अत्याधुनिक डा विंची एक्सआई रोबोटिक सर्जरी प्रणाली लागू करने के साथ शुरू हुआ था और धीरे-धीरे संस्थान की प्रमुख उन्नत शल्य सेवाओं में से एक के रूप में विकसित हुआ है।
डॉ. नेगी ने बताया कि जुलाई 2017 में यूरोलॉजी विभाग द्वारा पहली बार रोबोटिक सहायता से सर्जरी की गई थी। यह कार्यक्रम तब से विकसित होकर एक बहुविषयक पहल बन चुकी है, जिसमें यूरोलॉजी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, सामान्य शल्यचिकित्सा, एनेस्थीसियोलॉजी, नर्सिंग सेवाएं, बाल शल्यचिकित्सा, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी तथा ओटोराइनोलैरिंजोलॉजी विभाग शामिल हैं।
