नयी दिल्ली, 01 जुलाई (वार्ता) नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश के पहले निजी पॉइंट-इन-स्पेस (पिनएस) इंस्ट्रूमेंट अप्रोच प्रोसीजर को आंध्र प्रदेश के उंडावल्ली हेलीपोर्ट पर हेलीकॉप्टर संचालन के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है।
मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि यह प्रक्रिया भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने विकसित की है और इसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अनुमोदित किया है। इसे डीजीसीए के नियमों तथा अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के मानकों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप बनाया गया है।
गौरतलब है कि पिनएस प्रक्रिया उन्नत उपग्रह-आधारित नेविगेशन तकनीक का उपयोग करती है, जिससे हेलीकॉप्टर उन हेलीपोर्टों पर भी सुरक्षित और सटीक इंस्ट्रूमेंट एप्रोच कर सकते हैं, जहां पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग के लिए अवसंरचना उपलब्ध नहीं है। यह विशेष रूप से खराब मौसम तथा उन क्षेत्रों में अत्यंत लाभकारी है, जहां भूमि-आधारित नेविगेशन सहायता उपलब्ध नहीं होती।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, “देश की पहली पिनएस इंस्ट्रूमेंट अप्रोच प्रक्रिया की शुरुआत हेलीकॉप्टर संचालन के क्षेत्र में एक नये युग का आरंभ है। इससे उड़ान सुरक्षा, परिचालन दक्षता और सभी मौसमों में संचालन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।”
उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, डीजीसीए तथा आंध्र प्रदेश सरकार सहित सभी संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आधुनिक तकनीकों को अपनाकर हेलीकॉप्टर संचालन को अधिक विश्वसनीय और देशभर में अधिक सुलभ बनाना है।
परिचालन में स्वदेशी तकनीक के प्रयोग का एक सप्ताह के भीतर दूसरा सफल उदाहरण है। पिछले सप्ताह ही एक वाणिज्यिक विमान द्वारा देश के पहले स्वदेशी गगन-आधारित प्रिसिजन अप्रोच का सफल प्रदर्शन किया गया था।
इस मंजूरी से देशभर में इसी प्रकार की पिनएस प्रक्रियाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है। इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, आपदा राहत अभियानों, पर्यटन, अपतटीय (ऑफशोर) गतिविधियों, तीर्थयात्रा सेवाओं, कॉर्पोरेट विमानन तथा क्षेत्रीय संपर्क को उल्लेखनीय लाभ मिलेगा।
