जीसीडीजी रिपोर्ट: बंगलादेश में सितंबर 2024 से जून 2026 के बीच हिरासत में मौतों की संख्या बढ़कर 101 हुई

ढाका, 01 जुलाई (वार्ता) लोकतांत्रिक शासन के लिए वैश्विक केंद्र (जीसीडीजी) की ‘बंगलादेश में बिना मुकदमे के मौत’ नामक एक रिपोर्ट के अनुसार पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के शासन के दौरान बंगलादेश में हिरासत में होने वाली मौतों में चिंताजनक वृद्धि देखी गयी है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, शेख हसीना सरकार को हटाए जाने के बाद के महीनों में, जब श्री यूनुस बंगलादेश की अंतरिम शासन का नेतृत्व कर रहे थे, तब से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के सत्ता में आने तक, यानी सितंबर 2024 से जून 2026 के बीच बंगलादेश में हिरासत में होने वाली मौतों की संख्या में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गयी।

श्री यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के 18 महीनों के शासन के दौरान गिरफ्तारियां और अत्याचार चिंताजनक रूप से बढ़े।जीसीडीजी रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, इस 22 महीने की अवधि के भीतर हिरासत में मौत के 101 से अधिक मामले दर्ज किये गये थे। इनमें पीड़ितों में राजनीतिक कार्यकर्ता, सामुदायिक नेता, श्रमिक, छात्र और आम नागरिक शामिल थे।

संगठन ने कहा कि इन मामलों को मीडिया रिपोर्टों सहित सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का उपयोग करके संकलित किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य की हिरासत में रहने के दौरान होने वाली मौतों का एक विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करना था। इनमें गोपालगंज के एक युवा राजनीतिक कार्यकर्ता इलाही सिकदार; रंगपुर की एक गारमेंट श्रमिक चंपा खातून; और स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व सरकारी मंत्री रमेश चंद्र सेन शामिल थे।

रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि ये मौतें अलग-थलग घटनाओं के रूप में नहीं हुई थीं। विभिन्न समस्याओं के लगातार जमा होते जाने की वजह से इन हत्याओं को अंजाम दिया गया। यह एक प्रणालीगत त्रुटि को रेखांकित करती हैं। मृतकों में से कई लोग अवामी लीग और उसके संबद्ध संगठनों से जुड़े थे, लेकिन उन लोगों को हत्या भी की गयी, जो किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं थे।

रिपोर्ट में मनमानी हिरासत, निष्पक्ष सुनवाई से इनकार और जिम्मेदार लोगों के लिए जवाबदेही की कमी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने के कारण स्वतंत्र जांच मुश्किल हो गई है, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि हिरासत में मौतों की वास्तविक संख्या कहीं अधिक हो सकती है।

जीसीडीजी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार हिरासत में होने वाली प्रत्येक मौत की तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। बंगलादेशी अधिकारियों से कानून के शासन को बनाए रखने, बंदियों के अधिकारों की रक्षा करने और जहां दुर्व्यवहार की पुष्टि हो, वहां जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र जांच कराने का समर्थन करने की बात कही गयी है। यह सुनिश्चित करने की भी अपील की गयी है कि जिम्मेदार लोगों को निष्पक्ष न्यायिक कार्यवाही के माध्यम से न्याय के कटघरे में लाया जाये। इसमें दीर्घकालिक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करने और भविष्य में होने वाले उल्लंघनों को रोकने के लिए जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत परिवर्तनों को बेहद जरूरी बताया गया है।

 

 

 

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