नयी दिल्ली, 20 जून (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच ईरान युद्ध और जी-7 शिखर सम्मेलन से जुड़े मुद्दों को लेकर सार्वजनिक विवाद गहरा गया है। दोनों नेताओं को कभी करीबी राजनीतिक सहयोगी माना जाता था।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब श्री ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने कई बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान इटली ने अपने हवाई अड्डों और रनवे के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी, जिससे अमेरिका को असुविधा हुई।
श्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इटली और अन्य नाटो सहयोगियों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन इसके बावजूद इटली ने सहयोग नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान पर सैन्य जीत के बाद सुश्री मेलोनी दोबारा अमेरिका के साथ निकटता बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।
सुश्री मेलोनी ने इन दावों को खारिज करते हुए एक वीडियो संदेश में कहा कि श्री ट्रंप का बयान “पूरी तरह मनगढ़ंत” है। उन्होंने कहा, “न तो मैं और न ही इटली किसी से भीख मांगते हैं।”
विवाद के बाद इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो तजानी ने अमेरिका की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी। उन्होंने श्री ट्रंप की टिप्पणियों को सुश्री मेलोनी और इटली, दोनों के लिए अपमानजनक बताया। मियामी में प्रस्तावित एक व्यापार एवं विज्ञान सम्मेलन में उनकी भागीदारी भी रद्द कर दी गयी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला ने भी सुश्री मेलोनी के प्रति समर्थन व्यक्त किया है और श्री ट्रंप की टिप्पणियों को देश के प्रति अनादरपूर्ण बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ईरान संघर्ष, सैन्य सहयोग और अमेरिकी विदेश नीति को लेकर अमेरिका तथा यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को भी उजागर करता है।
